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लोकसभा चुनाव 2019: हार की हैट्रिक नहीं बनाना चाहती कांग्रेस, सामने है वजूद बचाने की बड़ी चुनौती

Thu, 11 Apr 2019 06:25 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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कांग्रेस - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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सिलसिलेवार हार की स्थितियों के बीच लोकसभा का यह चुनाव कांग्रेस के लिए उसके वजूद से जुड़ा माना जा रहा है। उत्तराखंड में पहले वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव पांचों सीटों पर करारी हार के बाद, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड हार ने कांग्रेस के मनोबल को कमजोर किया है।

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पार्टी इस चुनाव में प्रचंड हार की हैट्रिक नहीं चाहती है। इसलिए उसने सभी सीटों पर अपनी ताकत झोंक दी है। हालांकि कुप्रबंधन की वजह से कई जगह कांग्रेस को पूरे चुनाव में दिक्कत भी उठानी पड़ी है, लेकिन अपने दिग्गज नेताओं के चुनावी रणभूमि में उतरने से पार्टी इस बार अच्छे प्रदर्शन का दावा कर रही है।

इन स्थितियों के बीच, कांग्रेस का दावा पांचों सीट जीतने का है। वह भाजपा के साथ मुख्य मुकाबले में भी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि कांग्रेस यदि एक भी सीट जीतती है, तो यह उसके लिए हार का क्रम तोड़कर वापसी की तरफ बढ़ने जैसा होगा।
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कांग्रेस ने इस बार तीन सीटों पर अपने दिग्गज नेताओं को प्रत्याशी बनाया है। नैनीताल सीट पर राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सीएम हरीश रावत चुनाव लड़ रहे हैं। खुद प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह टिहरी सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी हैं।

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हर सीट पर प्रत्याशी आगे, संगठन पीछे

इसके अलावा, राज्यसभा के सदस्य प्रदीप टम्टा अल्मोड़ा सीट पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा को टक्कर दे रहे हैं। हरिद्वार सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी अंबरीश कुमार पूर्व विधायक हैं और उन्हें अंतिम समय में भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के मुकाबले चुनाव मैदान में उतारा गया है। पौड़ी सीट पर राहुल गांधी की पसंद और पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी को खड़ा किया गया है। हालांकि उनकी गैरसियासी पृष्ठभूमि रही है।

लोकसभा के इस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी आगे और संगठन पीछे दिखाई दिया है। यहां भाजपा की जैसी स्थिति कतई नही रही, जहां संगठन ने पूरे चुनाव को अपने हाथ में लिया। इसके एकदम उलट, चुनावी रणनीति बनाने और प्रबंधन में प्रत्याशियों ने खुद ही अपनी भूमिका निभायी। कांग्रेस संगठन उनके पीछे पीछे चला। हालांकि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह का कहना है कि संगठन ने सभी पांचों सीटों पर बराबर मेहनत की है। इसके सकारात्मक परिणाम 23 मई को सामने आ जाएंगे।
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