अब तक तीन महिलाएं ही पहुंचीं लोकसभा
बता दें कि पहले लोकसभा चुनाव में टिहरी संसदीय सीट से कमलेंदुमती शाह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतने में सफल रहीं। इसके बाद नैनीताल सीट से ईला पंत और फिर राज्य गठन के बाद महज एक महिला माला राज्यलक्ष्मी शाह संसद पहुंच पाईं। सालों बाद भी महिलाओं को लोकसभा या राज्य विधानसभा में उनकी आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।
राजनीतिक दलों ने किया परहेज
उत्तराखंड में महिला उम्मीदवारों पर दांव लगाने में प्रमुख दलों ने परहेज किया है। हालांकि महिला अधिकार, सशक्तिकरण और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं की बात जोरों से की जाती है लेकिन जब चुनाव मैदान में उतारने की बात आती है तो राजनीतिक दलों की प्राथमिकता बदल जाती है। केवल टिहरी लोकसभा सीट इसका अपवाद है, जहां से प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा ने माला राज्यलक्ष्मी शाह पर दांव खेला है। गढ़वाल सीट से पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक ने सुरेशी देवी, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया ने रेशमा और अल्मोड़ा से उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने किरन आर्या को मैदान में उतारा है।
ये भी पढ़ें...Somvati Amavasya 2024: दुर्लभ योग...गंगा स्नान को हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, देखें ये खास दस तस्वीरें