रोजगार और आर्थिकी में हो सकती है अहम भूमिका
उत्तराखंड में खेलों की रोजगार और आर्थिकी में अहम भूमिका हो सकती है। खेल अवस्थापना सुविधाओं का विकास कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की नर्सरी तैयार की जा सकती है। खेलों में अच्छे प्रदर्शन से खिलाड़ियों के लिए रोजगार के रास्ते खुलेंगे। वहीं, राज्य के विभिन्न खेल मैदानों के जरिये राज्य की आर्थिकी को बढ़ाया जा सकता है।
खेल विभाग की ओर से किए गए कुछ कार्य
राज्य में विशिष्ट खिलाड़ियों को सम्मान देने एवं उन्हें उचित रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें, इसके लिए आउट ऑफ टर्न नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। राज्य में खेलों को बढ़ावा देने एवं खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री खेल विकास निधि दी गई है। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी छात्रवृत्ति योजना एवं मुख्यमंत्री खिलाड़ी उन्नयन योजना शुरू की गई है
देखने में आया है कि विभिन्न खेल एसोसिएशनों पर राजनीति से जुड़े लोग काबिज हैं, ऐसे में कई बार खिलाड़ियों का चयन पारदर्शी तरीके से नहीं हो पाता। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि राजनीति से जुड़े लोग एसोसिएशन से बाहर हों और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को खेलों में प्रदर्शन का मौका मिले। -सुरेंद्र कनवासी, अर्जुन पुरस्कार विजेता
राजनीतिक दलों का खिलाड़ियों के मसले को अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल न करना युवाओं संग अन्याय है। देश के खेलों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पटल पर धाक जमाने के लिए बुनियादी सुविधाओं के साथ राजनीतिक दृढ़ संकल्प की जरूरत है, लेकिन खेलों के विकास का मुद्दा चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की जुबां पर न आना युवाओं में निराशा पैदा कर रहा है। -डीएम लखेड़ा, सचिव देहरादून बेसबॉल संघ
उत्तराखंड से जुड़ा नाम, खुद के दम पर बनाई पहचान
खेलों की दुनिया में चमक बिखरने वाले कई नाम हैं, जिनका संबंध उत्तराखंड से है, लेकिन उन्होंने खुद के दम पर अपनी पहचान बनाई। बछेंद्री पाल, जसपाल राणा, मीर रंजन नेगी, वंदना कटारिया, लक्ष्य सेन सरीखे कई चर्चित खिलाड़ी राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में देश और राज्य का नाम रोशन किया। राज्य में ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जो जसपाल राणा, वंदना कटारिया की तरह अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर सकते हैं, लेकिन राज्य गठन के 23 साल बाद खेलों के बारे में गंभीरता से सोचा गया। लेकिन, चुनाव प्रचार में खेल और खिलाड़ियों के मुद्दों पर
चर्चा न होना बता रहा है कि अभी भी खेलों को लेकर राजनीतिक सोच नहीं बन पा रही है।
खिलाड़ी जिन्होंने बिखेरी देश-दुनिया में अपनी चमक
बछेंद्री पाल : 1984 में माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाली पहली
भारतीय महिला बनी।
जसपाल राणा : निशानेबाज।
मीर रंजन नेगी : हॉकी।
वंदना कटारिया : हॉकी।
लक्ष्य सेन : बैडमिंटन।
नितेंद्र सिंह रावत : एथलेटिक्स।
कुशाग्र रावत : तैराकी।
स्नेहा राणा : क्रिकेट।
मयंक मिश्रा : क्रिकेट।
ऋषभ पंत : क्रिकेट।
आयुष बडोनी : क्रिकेट।
अनुज रावत : क्रिकेट।
मनीष पांडे : क्रिकेट।
पीहू आर्या : बॉक्सिंग।
किशोर मौर्य : बॉक्सिंग।
सूरज पंवार : पैदल चाल।
मानसी नेगी : पैदल चाल।
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खेलों के क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देंगे : भाजपा
भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में कहा है कि हम 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए आईओए को समर्थन देंगे और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए स्टेडियम के साथ अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र एवं संसाधनों का विकास करेंगे। सेवानिवृत्त खिलाड़ियों के लिए एक नया कार्यक्रम शुरू करेंगे। उन्हें शैक्षिक, रोजगार और पदोन्नति के उपयुक्त अवसर प्रदान करेंगे। खेलों इंडिया योजना में देश के पारंपरिक खेलों को शामिल करेंगे। खेलों के क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देंगे।