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मिशन 2019: यहां कांग्रेस प्रत्याशी के पास है 'किंग' बनने का मौका, 4 दशक में जीते हैं सिर्फ एक चुनाव

Thu, 23 May 2019 06:37 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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कांग्रेस प्रत्याशी अम्बरीष कुमार - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड की हरिद्वार लोकसभा सीट से कांग्रेस के दावेदार अंबरीष कुमार के पास इस बार किंग बनने का मौका है। पिछले चार दशक से वे हरिद्वार की राजनीति की धुरी जरूरी माने जाते रहे हैं लेकिन सच ये भी है कि वे पिछले चार दशक में सिर्फ एक बार ही चुनाव जीते हैं। 

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भाई जी के नाम से राजनीतिक हलकों में मशहूर अंबरीष कुमार कांग्रेस के नगर महामंत्री और युवक कांग्रेस के शहर अध्यक्ष रहे। उन्हें वर्ष 1974-75 से ही कांग्रेस के टिकट का प्रबल दावेदार माना जाता रहा है, वर्ष 1974 में हरिद्वार की सीट समझौते के तहत वामपंथी दलों के हिस्से में आ गई और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आरके गर्ग चुनाव जीते।

इसके बाद 1980 में भेल के श्रमिक नेता रामयश सिंह की दावेदारी उन पर भारी पड़ गई। 1985 के चुनाव में सहारनपुर के ठाकुर नेता महावीर राणा पर कांग्रेस ने विश्वास जताया तो अंबरीष कुमार शेर के चुनाव चिह्न पर निर्दलीय मैदान में उतारे। इस बार भी वे बेहद करीबी मुकाबले में वे चुनाव हार गए।

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वर्ष 1989 में कांग्रेस ने तत्कालीन शहर अध्यक्ष पारस कुमार जैन को टिकट दिया तो अंबरीष फिर जनता दल के प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह के साथ चले गए और वीरेंद्र सिंह को विधायक बनवाने में अहम भूमिका निभाई। जनता दल अजीत ने उन्हें 1991 में चुनाव में प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी जगदीश मुनि से वे दोबारा चुनाव हारे। 

वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर अंबरीष कुमार पहली बार हरिद्वार सीट से विधायक बनने से कामयाब हुए। वर्ष 2000 में अलग राज्य बनने के बाद वर्ष 2002 और वर्ष 2007 का चुनाव भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के सिंबल पर ही लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। 

 
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वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का दामन थामने के बाद उन्होंने रानीपुर सीट से दावेदारी की लेकिन ऐनवक्त पर पार्टी ने किसान नेता बलवंत सिंह चौहान को टिकट दे दिया। अंबरीष फिर निर्दलीय मैदान में उतरे और भाजपा से हार गए। 

वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में फिर वापसी के बाद अंबरीष कुमार को 2017 में रानीपुर विधानसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में टिकट मिला। लेकिन यहां भी उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया और उन्हें फिर हार मिली। 

अब कांग्रेस ने फिर उनपर भरोसा जताया है और पहली बार उन्हें हरिद्वार लोकसभा सीट पर चुनाव मैदान में उतार है। ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके पास चुनाव जीतकर किंग बनने का मौका है। 
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