वर्ष 1989 में कांग्रेस ने तत्कालीन शहर अध्यक्ष पारस कुमार जैन को टिकट दिया तो अंबरीष फिर जनता दल के प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह के साथ चले गए और वीरेंद्र सिंह को विधायक बनवाने में अहम भूमिका निभाई। जनता दल अजीत ने उन्हें 1991 में चुनाव में प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी जगदीश मुनि से वे दोबारा चुनाव हारे।
वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर अंबरीष कुमार पहली बार हरिद्वार सीट से विधायक बनने से कामयाब हुए। वर्ष 2000 में अलग राज्य बनने के बाद वर्ष 2002 और वर्ष 2007 का चुनाव भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के सिंबल पर ही लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का दामन थामने के बाद उन्होंने रानीपुर सीट से दावेदारी की लेकिन ऐनवक्त पर पार्टी ने किसान नेता बलवंत सिंह चौहान को टिकट दे दिया। अंबरीष फिर निर्दलीय मैदान में उतरे और भाजपा से हार गए।
वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में फिर वापसी के बाद अंबरीष कुमार को 2017 में रानीपुर विधानसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में टिकट मिला। लेकिन यहां भी उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया और उन्हें फिर हार मिली।
अब कांग्रेस ने फिर उनपर भरोसा जताया है और पहली बार उन्हें हरिद्वार लोकसभा सीट पर चुनाव मैदान में उतार है। ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके पास चुनाव जीतकर किंग बनने का मौका है।