छावानी बाजार चकराता में वीर शहीद केसरी चंद के जन्म दिवस पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते लोक कल?
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जौनसार बावर के पहले शहीद वीर केसरी चंद के जन्मदिवस पर लोक कला मंच से जुड़े कलाकारों और सदस्यों ने छावनी बाजार स्थित शहीद स्मारक पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया। कलाकारों ने पारंपरिक ढोल बजाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
मंच के निर्देशक नंदलाल भारती ने शहीद के जीवन पर प्रकाश डाला। बताया शहीद केसरी चंद का जन्म 1 नवंबर 1920 को चकराता के अंतर्गत क्यावा गांव में पं. शिवदत्त के घर पर हुआ था। 10 अप्रैल 1941 में इंटर की परीक्षा पूर्ण किए बिना ही वह रॉयल इंडियन आर्मी की सर्विस कोर में नायब सूबेदार के पद पर भर्ती हो गए। 29 अक्तूबर 1941 को उन्हें मलाया युद्ध के मोर्चे पर तैनात किया गया। जहां पर जापानी फौज ने उन्हें बंदी बना दिया। जिसके बाद यहां से आजाद होकर वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस के तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा के नारे से प्रभावित होकर आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। इंफाल के मोर्चे पर एक पुल को उड़ाने के प्रयास में ब्रिटीश फौज ने उन्हें पकड़ लिया और बंदी बनाकर जेल भेज दिय। यहां ब्रिटीश राज्य के खिलाफ षड़यंत्र के अपराध में उन्हें मृत्यु दंड की सजा दी गई। 24 वर्ष की अल्पायु में ही यह अमर बलिदानी तीन मई, 1945 को जय हिंद का उद्घोष करते हुए फांसी के फंदे पर झूल गया।
इस अवसर पर लोक कला मंच के निर्देशक नंद लाल भारती, पूर्व जिला पंचायत सदस्य राधा भारती, छावनी परिषद के उपाध्यक्ष चंदन रावत, आर्य समाज मंदिर के अध्यक्ष तीर्थ कुकरेजा, ग्राम प्रधान लाच्छा जयपाल सिंह, टीकाराम शाह, राजेंद्र चौहान, दीवान प्रेमी आदि मौजूद रहे।