उनके ये शब्द सुनकर मैं निहाल हो गया। आज यकीन नहीं हुआ कि उन्हें पीएम का फोन आया है। उनसे प्रधानमंत्री बात कर रहे हैं। उनके लिए ये किसी सपने से कम नहीं था। सन साठ से जनसंघ से जुड़े बौंठियाल से प्रधानमंत्री ने करीब तीन मिनट बात की। पीएम ने बताया कि आज वह जनसंघ से जुड़े अपने पुराने लोगों से बात कर रहे हैं। यह समय संकट का है इसलिए वे सभी की कुशल क्षेम ले रहे हैं।
तीन मिनट की बातचीत में पीएम और बौठियाल ने बदरीनाथ व श्रीनगर गढ़वाल की मुलाकातों को याद किया। बौठियाल के मुताबिक, मोदी ने उनसे पूछा वहां सब ठीक है तो मैंने जवाब दिया कि ये देवभूमि है, यहां सब ठीक है। इस पर मोदी ने उनसे कहा, इसीलिए तो मैंने आपको फोन किया। बौठियाल ने कहा कि ये किसी कार्यकर्ता के लिए बहुत बड़ा सम्मान है। जब देश का प्रधानमंत्री स्वयं फोन करके उनका हालचाल पूछता है। मोदी की यही खूबी उन्हें जननायक बनाती है।
मोहनलाल बौठियाल उत्तराखंड में बीजेपी के संस्थापकों में से एक हैं। हालांकि अब वे मुख्यधारा की सियासत से बाहर नेपथ्य में हैं। पीएम ने उनसे बात करके यह संदेश दिया कि जिन पुराने कार्यकर्ताओं की बदौलत पार्टी शीर्ष पर पहुंची है, उसकी बुनियाद के पत्थर मोहन लाल बौठियाल जैसे पुराने और खांटी कार्यकर्ता हैं। बौठियाल सन 1958 में बाल स्वयं सेवक बनें।
साठ के दशक में वह सीधे जनसंघ से जुड़ गए। 1970 में जनता पार्टी में फिर 80 में भाजपा के सदस्य बने। तब से भाजपा से उनका अटूट रिश्ता रहा है। बीजेपी को एक पार्टी के तौर पर खड़ा करने के लिए उनका बड़ा योगदान है। राज्य बनने के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ पदों पर रहे। पंचायत प्रकोष्ठ व अनुशासन समिति के अध्यक्ष रहे। कई बार गढ़वाल लोकसभा के प्रभारी व पालक रहे। 2014 से 20 तक राष्ट्रीय परिषद के सदस्य रहे।
बीजेपी सरकार के समय वन निगम व जलागम प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी रहे। विद्या भारती, रामजन्मभूमि आंदोलन व राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। कई बार जेल भी गए। आपातकाल में भी भूमिगत आंदोलन में सक्रिय रहे। राज्य बनने से पहले पर्वतीय विकास परिषद के सदस्य भी रहे।