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Lockdown: भारत-नेपाल सीमा पर एक महीने बाद खुले अंतरराष्ट्रीय झूला पुल, 2257 लोगों की हुई वतन वापसी

Thu, 30 Apr 2020 08:13 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़/धारचूला/झूलाघाट

सार

  • भारत-नेपाल को जोड़ने वाले तीन अंतरराष्ट्रीय झूलापुलों से लौटे स्वदेश
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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एक महीने के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बृहस्पतिवार को करीब 2257 नेपाली नागरिकों की वतन वापसी हो गई है। भारत और नेपाल को जोड़ने वाले तीन अंतरराष्ट्रीय झूलापुलों को खोला गया। इस दौरान बलुवाकोट व धारचूला से 958 और झूलाघाट से 1299 नेपाली नागरिकों को नेपाल भेजा गया। एक माह बाद भारत के अलग-अलग शिविरों से निकलकर वतन वापसी के दौरान सभी नागरिकों के चेहरों पर खुशी के भाव थे।

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कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन में भारत-नेपाल को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय झूलापुल के गेट बंद होने से लगभग 2257 नेपाली नागरिक भारत में ही फंस गए थे। इन नेपाली नागरिकों को धारचूला, बलुवाकोट, बरम, पिथौरागढ़ और झूलाघाट के स्कूलों और अन्य सरकारी भवनों में बनाए गए शिविरों में रखा गया था। धारचूला तहसील क्षेत्र में सर्वाधिक 900 नेपाली रह रहे थे।

इन सभी नेपाली नागरिकों के भोजन की व्यवस्था प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर से की जा रही थी। नेपाल में लगातार लॉकडाउन की सीमा बढ़ने और शिविर में एक माह से भी अधिक समय बीतने से नेपाली नागरिकों में बेचैनी थी। चार दिन पूर्व नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों को वापस लेने के लिए भारतीय प्रशासन को पत्र भेजा था। यह प्रस्ताव जिलास्तर से केंद्र सरकार को भेजा गया था।
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गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद बृहस्पतिवार की सुबह दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, एसएसबी की मौजूदगी में झूलाघाट, बलुवाकोट और धारचूला के झूलापुलों से नेपाली नागरिकों को नेपाल भेजा गया। धारचूला में एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला की मौजूदगी में नेपाली नागरिक नेपाल भेजे गए। पिथौरागढ़ के राहत शिविरों में रह रहे नेपाली नागरिकों को वाहनों से झूलाघाट पहुंचाया गया। इस दौरान एसडीएम तुषार सैनी मौजूद रहे।

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घर वापसी के समय लगे नारे, भारत-नेपाल जिंदाबाद

लॉकडाउन के कारण धारचूला में रह रहे सैकड़ों नेपाली नागरिकों में 12 नेपाली महिलाओं और सात बच्चों को भी एक माह तक घर वापसी का इंतजार करना पड़ा। जब लगभग 35 दिन बाद नेपाल को रवाना हुए तो नेपाली नागरिकों ने भारत-नेपाल जिंदाबाद के नारे लगाए।

जीजीआईसी बरम राहत शिविर में अंभाकला अपनी आठ माह की बेटी माया, पति हरक बहादुर और तीन बच्चों के साथ एक माह से रह रही थी। वापसी के समय सभी भावुक दिखे। उन्होंने भोजन और ठहरने के प्रबंध के लिए भारत सरकार और प्रशासन का आभार जताया। शिविर में रह रही चार माह की गर्भवती देवकाली देवी अपने पति और दो बच्चों के साथ अपने घर लौटी।

उन्होंने अच्छी व्यवस्था के लिए एनएचपीसी और स्थानीय प्रशासन की जमकर प्रशंसा की। नेपाल के तिंकर गांव की जयंती देवी अपने पति रतन सिंह के इलाज के लिए भारत आई थी लॉकडाउन के कारण एक महीने से भारत मे फंस गई। बृहस्पतिवार को पुल खुलने के बाद नेपाल जाने से राहत की सांस ली। एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि केंद सरकार की अनुमति मिलने के बाद शिविर में रह रहे 794 नेपाली मजदूरों के साथ स्थानीय फंसे 164 लोग सहित कुल 958 लोग नेपाल लौटे।
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घर से अच्छी सुविधाएं भारत में मिलीं

लॉकडाउन के बाद भारत में फंसे नेपाली नागरिकों ने नेपाल जाते समय भारत सरकार की ओर से किए गए इंतजामों की जमकर तारीफ की। वतन लौटने से पहले नेपाली नागरिकों ने बेहतर सुविधा देने के लिए भारत सरकार और जिला प्रशासन का धन्यवाद किया।

बैतड़ी के पुरचूड़ी की हेमा देवी स्वास्थ्य खराब होने से अपने पति के साथ जिला अस्पताल आई थीं। लॉकडाउन के चलते उन्हें पिथौरागढ़ के राहत शिविर में क्वारंटीन कर दिया गया। झूलापुल से स्वदेश लौटते समय उन्होंने सभी भारतीयों का धन्यवाद किया। कैलाली जिले के गोविंद सिंह धामी ने कहा ठेकेदार के पैसा न देनेे से बहुत दिक्कत हो गई थी। भारत सरकार ने अच्छा खाना, मनोरंजन और खेलकूद की व्यवस्था की थी। हमें बाहर रहने का जैसा एहसास नहीं हुआ।
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