- केंद्रीय गृहमंत्रालय और केरल सरकार को पत्र भेजें कि चौपहिया वाहन से रावल को उत्तराखंड आने की अनुमति दी जाए।
- कपाट खोलने के लिए रावल नहीं पहुंचते तो केदारनाथ धाम में उनके बदले स्थानीय पुजारी से पूजा अर्चना करवाई जाए।
- बदरीनाथ धाम में टिहरी राजघराने को विशेष अधिकार है कि वह कपाट खोलने की तिथि बढ़ा सकता है या फिर किसी अन्य को कपाट खोलने के लिए नामित कर सकता है।
पुराने दस्तावेजों का किया अध्ययन
सरकार ने बीकेटीसी के नियमों और दोनों धामों बदरी और केदार के पुराने दस्तावेजों का अध्ययन किया है। पिछली तीन से चार सदियों में तीन बार ऐसा हो चुका है कि रावल नहीं आने पर स्थानीय पुजारी कपाट खोलने के पूजन कार्य कर चुके हैं। मंत्रिपरिषद ने दोनों धामों के रावल समय से बुलाने के लिए केंद्र और संबंधित राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिख दिया है। बड़ी दिक्कत यह है कि रावल के उत्तराखंड पहुंचने पर उन्हें 14 दिन के लिए क्वांरीटन करना होगा। ऐसे में बदरीनाथ धाम के लिए टिहरी राजघराने से अनुरोध किया जाएगा कि वे इस मसले पर निर्णय लें।