हाल ही में खोजा गया और तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा एटलस कॉमेट शनिवार 18 अप्रैल से सुदूर अंतरिक्ष में नजर आने लगेगा। हांलाकि इसके लिए अभी दूरबीन की आवश्यकता होगी। यह कॉमेट मई के तीसरे सप्ताह में पृथ्वी के सर्वाधिक निकट आने वाला है जब यह आकाश में बेहद चमकदार नजर आएगा।
वैज्ञानिक इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं और लगातार इसका अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि वैज्ञानिकों के एक तबके का यह भी दावा है कि यह चार भागों में बंट गया है और इसकी चमक फीकी पड़ रही है। लेकिन इस रहस्य से भी अगले हफ्तों में पर्दा उठ जाएगा।
इस बीच 16 अप्रैल से लिरियड उल्कापात प्रारम्भ हो चुका है जो 28 अप्रैल तक चलेगा लेकिन थैचर कॉमेट द्वारा अंतरिक्ष में छोड़े गए कणों के कारण होने वाला यह उल्कापात 22 अप्रैल के सूर्योदय से पूर्व अपने चरम पर होगा जब आकाश में तेज चमक लिए प्रति घंटे लगभग 22 उल्काओं की तीव्र बौछार नजर आएगी।
24 अप्रैल को आकाशगंगा पिनव्हील और व्हर्लपूल का दुर्लभ नजारा दिखाई देगा जो अपनी विशिष्ट आकृति के कारण खगोल प्रेमियों का प्रिय है। 26 अप्रैल को अर्धचंद्र चमकदार ग्रह शुक्र के बेहद नजदीक होने से आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करेगा, जबकि 27 को अर्धचंद्र का मध्यम चमक वाले तारों तेजत, प्रोपस और जेमीनोरम के साथ आकर्षक संयोजन नजर आएगा।
इसी रात से शुक्र ग्रह वर्ष में सर्वाधिक चमक के साथ नजर आने लगेगा। जो सूर्य और चंद्रमा के बाद आकाश में सर्वाधिक चमकीला पिंड दिखाई देगा। 28 अप्रैल से अपनी विशिष्ट स्थिति के कारण चंद्रमा के कुछ क्रेटरों की परिधि खास चमक के साथ नजर आएगी जो वैज्ञानिकों के लिए इनके अध्ययन का खास अवसर होगा।
आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज के वैज्ञानिक डा. शशिभूषण पांडे का कहना है कि अप्रैल में अंतरिक्ष का दर्शन और अध्ययन करने का बेहतर अवसर होता है, इस बार पर्यावरण के अपेक्षाकृत अधिक साफ होने के कारण तमाम आकाशीय घटनाएं और भी आकर्षक लग रही हैं।