हरिद्वार जिला प्रशासन ने गैंडीखाता वन गुर्जर बस्ती से 20 दिन बाद पाबंदी हटा दी है। अब यहां के लोग लॉकडाउन के नियमों के तहत अपने जरूरी कामकाज कर सकेंगे। गांव के जिन लोगाें को होम क्वारंटीन किया गया है उनके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी जारी रहेगी। ऐसे लोगों के घर के बाहर आने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मालूम हो कि एक अप्रैल को पुलिस को पता चला था कि गुर्जर बस्ती के कई लोग भी जमात में शामिल होकर लौटे हैं। पहले तो यह लोग इस बात को छुपाते रहे, लेकिन सख्ती करने पर 98 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। तीन अप्रैल को प्रशासन ने इन 98 लोगों को कलियर में क्वारंटीन कर दिया था और बस्ती पर पाबंदी लगा दी थी। इन 20 दिनों में बस्ती में आवाजाही पर रोक लगी थी। केवल आवश्यक सेवा वालों को ही जाने दिया था। यहां से क्वारंटीन किए गए सभी लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। स्वास्थ्य विभाग ने जांच करने के बाद अधिकांश को कलियर से लाकर बस्ती में ही होम क्वारंटीन कर दिया है। अब कलियर में रह रहे 18 लोगों को भी यहां लाने की तैयारी है।
सभी 98 लोगों का स्वास्थ्य सामान्य होने पर जिला प्रशासन ने बस्ती पर लगी पाबंदी हटाने का निर्णय लिया। एसडीएम कुश्म चौहान ने बताया कि शुक्रवार से लॉकडाउन के नियमों का पालन कराते हुए अन्य क्षेत्रों की भांति यहां भी दुकानें खुलने लगेंगी और आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन जारी रहेगा। क्षेत्र के किसान अपने कृषि उपकरणों की मरम्मत करा सकेंगे और गेहूं एवं गन्ने की फसल को क्रय केंद्रों पर ले जा सकेंगे।
बस्ती के सभी सैकड़ों परिवार पशुपालन से जुडे़ हैं और प्रशासन ने इन लोगाें को दूध सशर्त बेचने की अनुमति दे दी है। एसडीएम कुश्म चौहान ने बताया कि अब सभी पशुपालक एक स्थान पर अपना दूध लाएंगे। इसी जगह से गाड़ियों से यह दूध भेजा जाएगा। कोई बाहरी दूधिये सीधे बस्ती में दूध लेने नहीं जा सकेगा। कोई भी बस्ती का पशुपालक दूध लेकर सीधे बाजार बेचने नहीं जा सकेगा।
पशुपालकों को उठाना पड़ा नुकसान
पूर्व प्रधान शमशेर भड़ाना, रोशन दीन, मोहम्मद आलम कसाना, सफी लोधा, बाबू खटाना, नूर भड़ाना, शमशेर कसाना आदि का कहना है कि लोगों को हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। हजारों लीटर दूध बर्बाद हो गया। पशुओं को देखभाल भी सही ढंग से नहीं कर पाए। इन लोगों ने पाबंदी के दौरान मदद करने वाले अधिकारियों की सराहना की।