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Lockdown 3.0 : उत्तराखंड में छोटी सरकार का कहना नहीं माना तो होगी बड़ी कार्रवाई, सीएस ने जारी किया आदेश

Tue, 05 May 2020 08:54 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • सीएस ने जारी किया आदेश, प्रधानों को सौंपी कोरोना से लड़ने की कमान
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उत्पल कुमार - फोटो : File Photo
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विस्तार
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लॉकडाउन 3.0 में प्रदेश की छोटी सरकारों पर सोमवार से गांव में बाहर से आने वाले लोगों केेे क्वारंटीन करने की जिम्मेदारी आ पड़ी। मुख्य सचिव उत्पल कुमार की ओर से इसके लिए बाकायदा आदेश भी जारी हुआ।

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आदेश के तहत सरकार ने ग्राम प्रधानों के हाथ में चाबुक भी पकड़ा दी। यह साफ कर दिया गया कि होम क्वारंटीन के संदर्भ में ग्राम प्रधानों के निर्देशों का पालन न करने वाले लोगों के खिलाफ आपदा प्रबंधन, महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सीएस का आदेश तीस जून तक प्रभावी है। अब प्रधानों को लोगों को क्वारंटीन करने से लेकर उनके खाने, रहने तक की व्यवस्था करनी होगी।

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इन कामों के लिए जारी किया सीएस ने आदेश...

- बाहर से गांव आने वाले का पंजीकरण, आरोग्य एप को डाउनलोड करवाना।
- गांव में आने वाले लोगों को 14 दिन क्वारंटीन कराना।
- होम क्वारंटीन न हो पाने वाले लोगों को पंचायत घर, स्कूल आदि स्थानों पर क्वारंटीन कराना होगा।
- क्वारंटीन स्थल की साफ सफाई व सैनिटाइजेशन कराना होगा।
- संस्थागत क्वारंटीन होने वाले लोगों में किसी में कोरोना संक्रमण हो तो उसकी जानकारी सीएमओ को देंगे।

संविधान का एक भी अधिकार नहीं दिया

प्रदेश सरकार को पंचायतों से सहयोग लेना चाहिए, उन्हें आदेश नहीं देना चाहिए। पंचायत प्रतिनिधि चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं। राज्य गठन के बाद से अभी तक सरकारों ने संविधान प्रदत्त एक भी अधिकार पंचायतों को नहीं दिया। अब ग्राम प्रधानों को गांवों का नया कलक्टर बना दिया। ग्राम प्रधानों, ग्राम प्रहरियों आदि को कोरोना वॉरियर घोषित करने और उनका बीमा कराने की मांग तक सरकार ने नहीं मानी।
- जोत सिंह बिष्ट, संस्थापक, पंचायत जनाधिकार मंच
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साधन तो मुहैया करा देते सरकार

सरकार को चाहिए कि प्रत्येक पंचायत को एक-एक लाख रुपये जारी करे। कहीं पंचायत भवन नहीं हैं तो कहीं अन्य सुविधाओं की कमी है। पंचायतों को आदेश जारी कर दिया गया, लेकिन इन बातों का ध्यान नहीं रखा गया। प्रवासी लौटेंगे तो उनके रोजगार का क्या होगा। ग्राम पंचायतों के पास संसाधन होंगे तो ही वे ये सारे काम कर पाएंगी।
- किशोर उपाध्याय, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष

क्या है चुनौती

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना, मजबूत सूचना तंत्र तैयार करने की प्रधान के सामने चुनौती है। प्रधान सरकार के कर्मचारी नहीं है। अभी तक पंचायतों को कुछ नहीं मिला है। इस वजह से चुप हैं कि देश इस समय कोरोना संकट से जूझ रहा है। गांव में जो भी आएगा वह गांव का ही निवासी होगा, उसके लिए तो हम जो कुछ बन पड़ेगा करेंगे ही।
- सुंदर सिंह, अध्यक्ष, जोनपुर ग्राम प्रधान संगठन
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