चार सत्रों में साहित्यिक परिचर्चाओं और विमर्शों का आयोजन किया जाएगा
महोत्सव का उद्घाटन में विभिन्न प्रदर्शनियों और लोक प्रस्तुतियों के साथ होगा। हिंदी और स्थानीय भाषाओं के 20 लेखकों की पुस्तकों का विमोचन भी शामिल होगा। 23 और 24 अक्टूबर को हिंदी और स्थानीय बोली-भाषाओं पर विशेष कार्यशालाओं का आयोजन होगा। जिसमें डॉ. निशंक की 12 पुस्तकों के गढ़वाली और कुमाऊंनी संस्करणों का लोकार्पण भी किया जाएगा।
पहले दो दिनों का संयोजन भाषा विज्ञानी रमाकांत बैंजवाल और बीना बैंजवाल करेंगे। इसी दौरान एनबीटी (नेशनल बुक ट्रस्ट) द्वारा बच्चों की किताबों की अनुवाद कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। 25 अक्तूबर को मुख्य उद्घाटन सत्र के बाद चार सत्रों में साहित्यिक परिचर्चाओं और विमर्शों का आयोजन किया जाएगा।
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26 अक्तूबर को पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण योग, अध्यात्म और संगीत के स्वास्थ्य पर प्रभावों पर विचार प्रस्तुत करेंगे। 27 अक्तूबर को समापन समाराेह होेगा। बैठक में पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सविता मोहन, पूर्व प्राचार्य डॉ. केएल तलवाड़, डॉ. बीना बैंजवाल, प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय, डॉ. बेचैन कंडियाल, बालकृष्ण चमोली, डॉ. सुप्रिया रतूड़ी, पूजा पोखरियाल, भारती मिश्रा, नालंदा पांडेय, मुकेश नौटियाल, अमित पोखरियाल और आशना नेगी सहित कई अन्य उपस्थित रहे।