अगले माह (मई) से प्रदेश में शराब महंगी हो सकती है। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए जो आबकारी नीति तैयार की जा रही है उसमें राजस्व वृद्धि पर जोर है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में स्थित शराब की दुकानों को बंद कराने से विभाग को राजस्व के मद में भारी नुकसान हो रहा है।
सरकार ने दुकानों का राजस्व बचाने के लिए स्टेट हाईवे को डीनोटिफाई करने का जो फैसला लिया है, उसका भी अधिक फायदा होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में जो दुकानें चल रही हैं उनकी लाइसेंस फीस बढ़ाई जा सकती है। इस स्थिति में इसका असर शराब की कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है।
वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान आबकारी विभाग 2100 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1900 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच पाया है। अप्रैल माह के दौरान शराब की दुकानों का लाइसेंस पुरानी आबकारी नीति के मुताबिक ही बढ़ाया गया है।