पिछले वर्ष आबकारी का राजस्व लक्ष्य 3600 करोड़ रुपये रखा गया था। फिर इसे जिलेवार अलग से निर्धारित किया गया था। लेकिन, इस बार कुल लक्ष्य में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
इस बार आबकारी नीति में जिलेवार अधिभार निर्धारित न होने से शराब ठेकेदार असमंजस में हैं। शराब ठेकों का रिन्यूअल किस आधार पर किया जाएगा, इसके लिए गणित अभी लगाया जाना है। यही नहीं शराब के ब्रांड के आधार पर भी अधिभार नहीं बताया गया है। ऐसे में ठेकेदारों का कोटा बढ़ेगा या घटेगा यह भी तय नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
पिछले वर्ष आबकारी का राजस्व लक्ष्य 3600 करोड़ रुपये रखा गया था। फिर इसे जिलेवार अलग से निर्धारित किया गया था। लेकिन, इस बार कुल लक्ष्य में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। जिलेवार इसका कोई जिक्र नहीं है। ऐसे में ठेकेदारों का कहना है कि जिलेवार निर्धारण न होने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किस जिले में कितना लक्ष्य बढ़ाया जा सकता है यह अभी तय नहीं है।
इस तरह माना जा रहा है कि इस बार कुछ ठेकों का रिन्यूअल होगा तो कुछ के लिए नए ठेकेदार भी ढूंढने पड़ेंगे। हालांकि, आबकारी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जिस हिसाब से कुल राजस्व में बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है उसी हिसाब से जिले और ठेकों का भी निर्धारण किया जाएगा। इसमें ठेकेदारों को असमंजस में रहने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
ठेकों से शराब लेंगे बार संचालक, ताकि बढ़े बिक्री
शराब ठेके से बिक्री बढ़ाने के लिए इस साल नई व्यवस्था की गई है। बार संचालक अब गोदामों से शराब नहीं लेंगे, बल्कि उन्हें ठेकों से ही लेनी होगी। ठेका भी उनका नजदीकी होना चाहिए। इससे माना जा रहा है कि ठेकों में बिक्री बढ़ेगी।