हाईकोर्ट में चुनौती दी गई
उच्च शिक्षा में विवि कुलपतियों की नियुक्तियों पर सवाल उठ रहे हैं। अर्हता पूरी न करने के मामले में बीते नवंबर में सोबन सिंह जीना विवि के कुलपति नरेंद्र सिंह भंडारी की नियुक्ति रद्द कर दी गई। इससे पहले 2019 में दून विवि के तत्कालीन कुलपति सीएस नौटियाल की नियुक्ति रद्द की जा चुकी है। इसके अलावा हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विवि की कुलपति अन्नपूर्णा नौटियाल व कुमाऊं विवि के कुलपति एनके जोशी की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
अब वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार के नवनियुक्ति कुलपति डॉ. परविंदर कौशल की नियुक्ति को लेकर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र जुगरान की ओर से राजभवन में शिकायत की गई है। शिकायत में कहा गया है कि नवनियुक्त कुलपति यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2018 के अनुसार प्रोफेसर के पद पर 10 साल की सेवा के अनुभव की अर्हता को पूरा नहीं कर रहे।
कुलपतियों की नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी हो रही है। मेरी जनहित याचिका पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने शोबन सिंह जीना विवि के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी की नियुक्ति रद्द की। इससे पहले दून विवि के कुलपति सीएस नौटियाल की नियुक्ति रद्द की गई। इसके अलावा दो बार पैनल बदले गए। -रविंद्र जुगरान, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता
कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी राजभवन को पैनल भेजती है। राजभवन को इसमें से किसी एक का चयन करना होता है। कुलपति की अर्हता का सवाल है तो इस मामले में सर्च कमेटी को इसे देखना चाहिए कि अभ्यर्थी अर्हता पूरी कर रहे हैं या नहीं। -रंजीत सिन्हा, सचिव राज्यपाल
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मैं अभी बाहर हूं, मेरे पास यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2018 के अनुसार प्रोफेसर के पद पर 10 साल की सेवा का अनुभव है। कोर्ट में मेरे खिलाफ कोई मामला विचाराधीन नहीं है। -डॉ. परविंदर कौशल, कुलपति वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार