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उत्तराखंड में लाइट रेल ट्रांजिट प्रोजेक्ट सिफारिशों को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की मंजूरी

Sat, 05 Jan 2019 12:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Trivendra Singh Rawat
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लाइट रेल ट्रांजिट (एलआरटी) सिस्टम को लेकर दी गई सिफारिशों पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शुक्रवार को मुहर लगा दी है। मेट्रो ट्रेन से मिलते-जुलते, लेकिन लागत में कम लाइट रेल ट्रांजिट (एलआरटी) सिस्टम को दून के नेपाली फार्म, छिद्दरवाला, मोहकमपुर जैसे बाहरी क्षेत्रों में धरातल पर उतारा जाएगा।

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इसके विपरीत, दून में आईएसबीटी, राजपुर रोड जैसे भीतरी क्षेत्रों में लाइट रेल ट्रांजिट (एलआरटी) या फिर पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (पीआरटी) में से कौन सा सिस्टम ज्यादा कारगर रह सकता है, इसके लिए एक बार फिर विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। एलआरटी, पर्सनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (पीआरटी) जैसे सभी काम पूर्व में गठित मेट्रो रेल कॉरपोरेशन प्रोजेक्ट के तहत किए जाएंगे। मेट्रो ट्रेन की स्थापना का विचार फिलहाल खारिज किया जा चुका है। अफसरों के साथ शुक्रवार को विधानसभा सभागार में बैठक में आवास मंत्री मदन कौशिक ने  प्रोजेक्ट से जुडे़ तमाम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

आवास मंत्री मदन कौशिक की अगुवाई में अफसरों और विधायकों के एक दल ने यूनाइटेड किगडम के लंदन और जर्मनी के फ्रैंकफर्ट और कोलोन शहर की परिवहन व्यवस्थाओं का अध्ययन किया था। इसके बाद इस दल ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सौंपी थी। अफसरों के साथ शुक्रवार को बैठक के बाद आवास मंत्री मदन कौशिक ने मीडिया को सीएम की मंजूरी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिफारिशों पर सीएम ने सहमति प्रकट कर दी है।
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प्राधिकरण को जल्द लाएंगे अधिनियम के दायरे में
सरकार उत्तराखंड यूनाइटेड मेट्रो पोलिटियन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (उम्टा) को जल्द ही अधिनियम के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। आवास मंत्री मदन कौशिक के अनुसार मेट्रो प्रोजेक्ट के मोबेेलिटी प्लान का अनुमोदन सीएम की अध्यक्षता वाली उम्टा की बैठक में कराना अनिवार्य है। केंद्र सरकार इस अनुमोदन को तब ही मान्यता देगी, जबकि यह अधिनियम के तहत गठित अॅथारिटी में पारित हो। इसलिए उम्टा के गठन को अधिनियम के दायरे में लाने की कार्रवाई की जानी जरूरी है। इस संबंध में जल्द ही बैठक आयोजित की जाएगी।

दो विशेषज्ञ और जुडे़ दून मेट्रो रेल कॉरपोरेशन में
दून मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के साथ दो विशेषज्ञ और जुड़ गए हैं। आवास मंत्री मदन कौशिक ने शुक्रवार को मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दून मेट्रो रेल कारपोरेशन का आधारभूत ढांचा मजबूत किया जा रहा है। इस संबंध में जो भी जरूरत है, उसे पूरा किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दो विशेषज्ञों के आ जाने के बाद दून मेट्रो प्रोजेक्ट का काम अब और तेजी से आगे बढ़ पाएगा।

सीएम को ये की गईं हैं प्रमुख सिफारिशें
 -देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश मेट्रो पोलिटियन क्षेत्र के मुख्य कारीडोर, जिसकी अनुमानित क्षमता छह हजार पीएचपीडीटी है, उनके लिए लाइट रेल ट्रांजिट (एलआरटी) प्रणाली सर्वोत्तम है।
-पर्सनल रैपिड ट्रांजिट(पीआरटी) को सहायक प्रणाली के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है। मै. एफडब्ल्यू पावर लि. के स्तर पर पूर्व में ही पीआरटी प्रणाली को पीपीपी मोड में हरिद्वार शहर में स्थापित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इन्टरेस्ट दिया गया है। पीआरटी के लिए मार्ग का चिन्हीकरण इस आधार पर किया जाना आवश्यक होगा कि इससे हरिद्वार शहर में आने वाले यात्रियों के लिए मुख्य जगहों को रेल व बस स्टेशन से जोड़ा जा सके।

-रोपवे प्रणाली, जिसकी गति काफी सीमित है, को वर्तमान में दून में एलआरटी के लिए सहायक प्रणाली के रूप में किसी चिन्हित छोटे स्ट्रेच पर प्रयोग बतौर संचालित किया जा सकता है। इस प्रणाली को हरिद्वार शहर में गंगा नदी के आर पार भी बनाया जा सकता है। साथ ही शहरी परिवहन के साधन के रूप में संचालित करने का निर्णय भी लिया जा सकता है।

-लंदन शहर में ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन के स्तर पर समस्त परिवहन संसाधनों के सफलतापूर्व संचालन और नियंत्रण को देखते हुए मेट्रो रेल कारपोरेशन को शहरी अवस्थापना और भवन निर्माण निगम लि. को समस्त कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था नियुक्त किया जाना चाहिए। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन की तरह ही दून मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी को भी पर्याप्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए जाने चाहिए।

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