शपथपत्र में ये बिंदु होंगे शामिल
- व्यक्तिगत बार परिसर में 21 वर्ष से कम आयु का युवक या युवती प्रवेश नहीं करेगा।
- परिसर में केवल सिविल में बिकने वाली शराब ही रखी होगी।
- भारत में निर्मित शराब और इंडियन स्कॉच नौ-नौ लीटर से ज्यादा नहीं होगी।
- इंपोर्टेड मदिरा 18 लीटर यानी दो पेटी ही रख सकते हैं।
- वाइन एक पेटी रखी जा सकती है।
- बियर 15.6 लीटर रख सकते हैं।
स्वाइप मशीन की रसीद नहीं दी तो लगेगा जुर्माना
कुछ समय पहले तक शराब के ठेकों पर केवल नकद ही शराब खरीदी जाती थी। अधिकतर ठेकों पर स्वाइप मशीन नहीं होती थी। लेकिन, दो साल पहले इसे हरेक के लिए अनिवार्य कर दिया था। बावजूद इसके कुछ ठेकों पर स्वाइप मशीन की रसीद ग्राहकों को नहीं दी जाती है। बहरहाल, इस बार आबकारी नीति में ऐसा करने वालों को जुर्माने की व्यवस्था की गई है। यदि रसीद नहीं दी तो 10 हजार रुपये जुर्माना देना होगा।
पहाड़ों पर इंपोर्टेड शराब पर जोर
पर्यटन गतिविधियां बढ़ने पर पहाड़ी क्षेत्रों में भी बड़े-बड़े रिजॉर्ट बन रहे हैं। यहां देशी-विदेशी मेहमान आकर रुकते हैं। लेकिन, पहाड़ों पर अच्छी क्वॉलिटी की शराब न होने से या तो उन्हें दूर से लानी पड़ती है या फिर अपने साथ बाहर से लानी होती है। इसमें सहूलियत के लिए इंपोर्टेड शराब की दुकानों को खोलने के लिए लाइसेंस फीस को घटा दिया गया है। इसे आठ 10 लाख रुपये से आठ लाख रुपये कर दिया गया है। जबकि, मैदानी क्षेत्रों में यही फीस 10 लाख रुपये न लेकर 15 लाख रुपये लिया जाएगा। आबकारी विभाग का मानना है कि मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर मैदानी इलाकों में जरूरत से ज्यादा खुल गए हैं।
आपदा में बंद होंगे ठेके तो माफ हो सकेगा अधिभार
इस बार ठेका संचालकों को राहत पहुंचाने का भी प्रयास किया गया है। दरअसल, पहले किसी आपदा, प्रदर्शन या महामारी आदि के वक्त ठेके बंद रहने पर अधिभार माफ करने की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन, अब यदि कोई दुकान इन कारणों से बंद रहती है तो जिलाधिकारी की संस्तुति पर शासन की पूर्वानुमति के बाद आबकारी आयुक्त संबंधित ठेके का अधिभार माफ कर सकेगा। कोविड के वक्त इस तरह की समस्या सबसे अधिक आई थी। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था।