दिवाली के नजदीक आते ही बाजारों में पटाखों व झालरों की मांग अधिक बढ़ जाती है। लेकिन इस बार देहरादून के लोगों में पटाखों के प्रति रुझान में कमी देखने को मिल रही है। इस बार अधिकतर दूनवासी ग्रीन दिवाली मनाएंगे।
पलटन बाजार में भी पटाखों ने दस्तक दे दी है। शहर के थोक विक्रेताओं से छोटे दुकानदारों ने पटाखे की दुकान लगा ली है। रोशनी का पर्व दिवाली के नजदीक आते ही बाजारों में पटाखों व अन्य विद्युत उपकरणों की मांग बढ़ जाती है।
इस बार लोगों में चाइनीज उत्पादों के प्रति क्रोध को देखते बाजारों में चीन के पटाखों नहीं लाये गये। पटाखा विक्रेता अनूप राय ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल लोगों को पटाखों के प्रति रुझान कम हुआ है। उन्होंने बताया कि जीएसटी के लगने के बाद भी पटाखों की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ा है।
पटाखों की कीमतें पिछली साल की दर पर ही है। लेकिन फिर भी लोग और बच्चे इस बार रोशनी वाले पटाखे खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहर में पटाखों की हो रही खरीद में लोग कम आवाज व धुआं फैलाने वालों पटाखों की मांग कर रहे हैं। इसमें फुलझड़ी से लेकर हल्के पटाखे ही ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।
झंड बाजार में लगी फुटकर दुकान के मालिक नीरज ने बताया कि इस बार पटाखों को लेकर लोगों की पसंद बदली है। पहले जहां लोग तेज आवाज वाले पटाखे खरीदना पसंद करते थे। वहीं इस साल लोगों ने केवल रोशनी वाले पटाखों को ही तवज्जो दी है। लोगों ने सब से ज्यादा चकरी, अनार, फुलझड़ी, पसंद की है।
वहीं पल्टन बाजार में खरीदारी करने पहुंची पींकी, रीना, शालू और ममता का कहना है कि पटाखे छुड़ाना अच्छा लगता है, लेकिन अपने पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए हम ग्रीन दिवाली मनाएंगे।