वन विभाग को सूचना देने के बाद भी तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। गांव के लोगों ने एसडीएम और वन रेंजर के मौके में पहुंचने तक शव न उठाने देने का एलान कर दिया है।
मासूम मयंक को निवाला बनाने से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। मयंक की मां रजनी देवी, दादा दलीप सिंह, दादी भागुली देवी, बहन दीक्षा का रो-रोकर बुरा हाल है। मयंक के पिता गजेंद्र सिंह खाती देहरादून में नौकरी करते हैं।
उनको घटना की जानकारी दे दी गई है। मयंक परिवार का एकलौता बेटा था। उससे बड़ी बहन दीक्षा (10) है। उधर वन रेंजर मनोज सनवाल का कहना है कि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा।
पहले भी हो चुकी घटनाएं
बिरगोली से सटे पोखरी गांव में जून 2018 में तेंदुए ने एक बच्चे को निवाला बना दिया था। चार महीने पहले बेड़ीनाग में तेंदुए ने एक बच्चे को मार डाला था। बीते तीन सितंबर को जिला मुख्यालय के पपदेव गांव की एक महिला तेंदुए के हमले में मारी गई। लगातार हो रहे तेंदुए के हमलों से लोग भारी दहशत में हैं।