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स्कूली बच्चों पर झपटा तेंदुआ, भगदड़ के दौरान खाई में गिरने से एक बच्चे की मौत, भीड़ ने जाम की सड़क

Sat, 10 Nov 2018 09:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागेश्वर
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चक्का जाम करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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तेंदुए के हमले के दौरान मची भगदड़ में हाई स्कूल छात्र हेमंत के मारे जाने के बाद परिजनों और क्षेत्रवासियों के सब्र का पैमाना छलक चुका है। भड़के क्षेत्रवासी विरोध स्वरूप सड़क पर उतर गए हैं। शनिवार को पहले उन्होंने डीएम को ज्ञापन दिया। इसके तुरंत बाद बागेश्वर बैजनाथ हाईवे पर धरने पर बैठ गए।

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सुबह 10:00 बजे से चल रहे चक्का जाम में सैकड़ों वाहनों की कतार लग गई। पुलिस प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्रवासियों को समझाने बुझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। परिजनों ने आदमखोर को तत्काल मारे जाने के आदेश मिलने और 25 लाख मुआवजा मिलने तक शव उठाने से इंकार कर दिया है।

इधर, अभी तक पंचनामा न भरने के कारण शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका है। शनिवार सुबह परिजन और क्षेत्रवासी डीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने जिलाधिकारी को अपनी मांग के संबंध में ज्ञापन दिया और मांग पूरी होने तक आंदोलन छेड़ने की चेतावनी देते हुए बागेश्वर बैजनाथ हाईवे पर स्थित गांव में ही मोर्चा संभाल लिया। परिजन और ग्रामीण गांव से गुजरने वाले हाईवे पर ही धरने पर बैठ गए। सुबह 10:00 बजे धरने के साथ ही दोनों ओर सड़क मार्ग जाम कर दी।

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तेंदुआ स्कूली बच्चों पर झपट पड़ा

द्यांगण गांव में शुक्रवार को तेंदुआ स्कूली बच्चों पर झपट पड़ा। बचने के फेर में मची भगदड़ के दौरान दसवीं के छात्र हेमंत टंगड़िया (15) की 50 मीटर गहरे गधेरे में गिरने से मौत हो गई। छात्र की मौत से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला अस्पताल में जमकर हंगामा किया। उन्होंने विधायक और एसडीएम को भी घेर लिया। भड़के ग्रामीणों ने तब तक शव  उठाने से इनकार किर दिया जब तक कि तेंदुए को आदमखोर घोषित नहीं किया जाता। ग्रामीण और परिजन देर रात तक जिला अस्पताल में डटे रहे। 

शुक्रवार शाम पांच बजे द्यांगण गांव में कुछ स्कूली बच्चे खेल रहे थे। तभी उन्हें एक मकान के पीछे झाड़ियों में तेंदुआ नजर आया। इसी मकान के बराबर में ही पिछले दिनों तेंदुआ एक आंगन से पांच साल के मासूम को उठा ले गया था। तेंदुए को देखते ही बच्चे डरकर भागने लगे। इस बीच, तेंदुए ने भागते बच्चों के झुंड पर झपटने की कोशिश भी की। भगदड़ के दौरान भागते वक्त हेमंत टंगड़िया (15) पुत्र कमल सिंह 50 मीटर गहरे गधेरे में गिर पड़ा। इधर, खौफजदा बच्चे घर पहुंचे और परिजनों को घटना की जानकारी दी। ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। वे अचेत और लहूलुहान  हालत में हेमंत को जिला अस्पताल ले आए, जहां चिकित्सकों ने हेमंत को मृत घोषित कर दिया। 

 

तेंदुआ आदमखोर घोषित

मौके पर पहुंच विधायक चंदनराम दास ने ग्रामीणों को बताया कि मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक ने तेंदुए को आदमखोर घोषित कर दिया है। शनिवार को शिकारी लखपत के गांव पहुंचने की उम्मीद है। डीएफओ आरके सिंह ने भी तेंदुए को आदमखोर घोषित होने की पुष्टि की।  वन कर्मियों ने देर रात प्रभावित इलाके में गश्त की।

विधायक बोले-आदमखोर को मारो, मैं साथ हूं
भड़के ग्रामीणों के घेराव के बीच क्षेत्रीय विधायक चंदन राम दास का भी पारा चढ़ गया। उन्होंने वन विभाग और प्रशासन पर नाकामी का आरोप लगाते हुए विधायकी से इस्तीफा देने की चेतावनी तक दे डाली। शुक्रवार देर शाम तेंदुए के आतंक और लगातार मौतों पर नाराज विधायक ने ग्रामीणों से कहा कि आदमखोर को मारो, मैं साथ हूं’।

जिम्मेदार विभाग और अधिकारी कुछ नहीं कर सकते तो वह जनता के साथ मिलकर आदमखोरों को मारेंगे। इधर, इस्तीफा देने की चेतावनी और आदमखोर को मारने के बयान के बाद सरकारी मशीनरी में हलचल मच गई है। विधायक ने जल्द आदमखोर से निजात न मिलने पर क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर हथियार उठाने की चेतावनी दी है। बता दें कि दिवाली के त्योहार के बीच आदमखोर के हमले के चलते बच्चे की मौत की यह दूसरी घटना है। मंगलवार को ही आदमखोर पांच साल के एक बालक को मौत के घाट उतार चुका है।  

 

तेंदुए को अविलंब आदमखोर घोषित कर मार गिराने की मांग

तेंदुए दिखने के बाद मची भगदड़ के दौरान एक छात्र की मौत की सूचना पर जिला अस्पताल पहुंचे पहुंचे विधायक चंदन राम दास और एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी को परिजनों और ग्रामीणों ने घेर लिया। उन्होंने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। उन्होंने हेमंत के शव का पंचनामा कराने से ही इनकार कर दिया और तेंदुए को अविलंब आदमखोर घोषित कर मार गिराने की मांग की।

इसको लेकर देर रात तक जिला अस्पताल में विरोध प्रदर्शन चलता रहा। भड़के लोगों को समझाने की विधायक और एसडीएम की तमाम कोशिश नाकाम रही। परिजनों और ग्रामीणों ने आदमखोर को मार गिराने तक शव न उठाने की चेतावनी दी है। इससे प्रशासन, पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं। 
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बचपन में ही उठ गया था मां का आंचल, संबंधी के घर हो रही थी परवरिश

हेमंत मूल रूप से अमसरकोट क्षेत्र के बोरगांव का निवासी था। बचपन में ही उसके सिर से मां का आंचल उठ गया था। मां जन्म देने के बाद गुजर गई थीं। पिता ने दूसरी शादी कर ली। उसकी यहां द्यांगण गांव निवासी संबंधी गंगा देवी के घर में परवरिश हो रही थी। हेमंत महज एक माह का था, जब यहां अपने पिता की बुआ गंगा देवी के घर परवरिश के लिए लाया गया था। वह जूनियर हाईस्कूल बहुली में 10वीं का छात्र था।  हेमंत गंगा देवी को आमा, जबकि उनके बेटे ललित मेहता को पिताजी कहकर बुलाया करता था। संबंधी ललित मेहता का कहना है कि उन्होंने बेटे की तरह हेमंत की परवरिश की लेकिन तेंदुए के आतंक और वन विभाग की नाकामी ने उसकी जान ले ली। ब्यूरो 

एक घंटे से मंडरा रहा था तेंदुआ, वन कर्मियों ने की अनसुनी 
द्यांगण गांव में शुक्रवार शाम एक घंटे से तेंदुआ मंडरा रहा था। कई ग्रामीणों ने तेंदुए को गांव में देखा था। मोबाइल फोन पर इसकी सूचना वन विभाग के कई कर्मियों को दी गई लेकिन किसी ने भी मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठाई। अगर वन कर्मी तुरंत एक्शन में आते तो शायद आज हेमंत सबके बीच होता। घटना के बाद देर शाम गांव के बाशिंदों ने बताया कि कई लोगों ने तेंदुए को देखा। बार-बार फोन पर सूचना दी लेकिन घटना के बाद भी कोई वन कर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।
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