विधानसभा चुनाव के मैदान में कई दिग्गज ऐसे हैं, जो जीत हासिल कर नया रिकॉर्ड कायम करेंगे। कोई आठवीं बार तो कोई डबल हैट्रिक लगाने की कोशिश में चुनाव मैदान में कूदा है। वहीं बड़ी संख्या में प्रत्याशी ऐसे हैं, जो तीसरी जीत तय कर हैट्रिक लगाने को संघर्ष कर रहे हैं।
1989 में पहली बार विधायक चुने गये हरबंस कपूर रिकॉर्ड आठवीं बार विधानसभा पहुंचने के लिए देहरादून कैंट सीट से चुनाव मैदान में हैं। यशपाल आर्य, डा. हरक सिंह रावत और बंशीधर भगत डबल हैट्रिक लगाने की दहलीज पर हैं। बाजपुर सीट से चुनाव लड़ रहे आर्य 1989, 93, 2002, 2007 और 2012 में विधायक रह चुके हैं। कोटद्वार से मैदान में उतरे हरक सिंह रावत 1991 में पहली बार विधायक चुने गए।
1996 को छोड़कर उन्होंने हर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। वहीं कालाढूंगी सीट से मैदान में कूदे बंशीधर भगत ने 2002 को छोड़कर 1991 से 2012 तक सभी चुनाव जीतने में सफलता हासिल की है। दूसरी ओर रुद्रपुर से लड़ रहे तिलक राज बेहड़ और काशी सिंह ऐरी पांचवीं बार विधानसभा पहुंचने की कोशिश में हैं। काशी सिंह ऐरी 1985, 89, 93 और 2002 में विधायक चुने जा चुके हैं। इसके अलावा गोविंद सिंह कुंजवाल, सुरेंद्र सिंह नेगी, प्रीतम सिंह और बिशन सिंह चुफाल भी पांचवीं बार विधानसभा पहुंचने की कोशिश में हैं।
ये लगा सकते हैं चौका
विकासनगर से मुन्ना सिंह चौहान, हरिद्वार से मदन कौशिक, गदरपुर से अरविंद पांडे, काशीपुर से हरभजन सिंह चीमा, खानपुर से कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, केदारनाथ से आशा नौटियाल चौथी बार विधायक बनने के लिए चुनाव लड़ रही हैं। यह सभी प्रत्याशी तीन चुनाव जीतकर हैट्रिक लगा चुके हैं। वहीं डोईवाला से त्रिवेंद्र रावत, पिथौरागढ़ से प्रकाश पंत, रामनगर से दीवान बिष्ट, प्रतापनगर से विजय सिंह पंवार, रामनगर से रणजीत रावत, मंगलौर से काजी निजामुद्दीन, द्वाराहाट से पुष्पेश तिवारी हैट्रिक लगाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं।
एनडी व गुलाब सिंह के नाम रिकॉर्ड
प्रदेश में सबसे ज्यादा आठ बार विधायक रहने का रिकॉर्ड पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी और गुलाब सिंह के नाम पर है। एनडी तिवारी 1951 में नैनीताल साउथ, 1969, 74, 77, 85, 89 में काशीपुर, 1991 में हल्द्वानी और 2002 में रामनगर विधानसभा सीट से जीत हासिल कर चुके हैं। वहीं गुलाब सिंह ने 1957, 62, 67 व 69 में मसूरी और 1974, 80, 85 व 89 में चकराता सीट से जीत हासिल की। शिवानंद नौटियाल ने 1969 में पौड़ी, 1974, 77, 80, 85, 89 में कर्णप्रयाग सीट से जीत हासिल की। इसके अलावा शांति प्रपन शर्मा और मातबर सिंह कंडारी, काजी मोहिउद्दीन पांच बार और केदार सिंह फोनिया व चंद्र सिंह रावत चार बार विधायक रह चुके हैं।