मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, भाजपा नेता सतपाल महाराज, डा. हरक सिंह रावत समेत करीब दो दर्जन दिग्गज नेता विधानसभा चुनावों में खुद को वोट नहीं दे सकेंगे।
विधानसभा पहुंचने की जुगत में यह सभी दिग्गज दूसरे विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में यह अपने लिए वोट तो मांग सकेंगे लेकिन खुद को वोट नहीं डाल सकेंगे। दिग्गजों की इस सूची में पहले नंबर पर खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत हैं। हरीश रावत हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री दोनों ही विधानसभाओं के वोटर नहीं हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सहसपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी हैं जबकि वह वहां के वोटर नहीं हैं। उनका नाम दून की वोटर लिस्ट में दर्ज है। भाजपा नेता सतपाल महाराज भी चौबट्टाखाल के वोटर नहीं हैं लेकिन वहां से चुनाव लड़ रहे हैं।
इस सूची में रामनगर से लड़ रहे मुख्यमंत्री के करीबी रंजीत रावत, बागी होकर भाजपा का दामन थामने वाले कोटद्वार से प्रत्याशी डा. हरक सिंह रावत, यमकेश्वर से ऋतु खंडूडी व शैलेंद्र सिंह रावत और देवप्रयाग से विनोद कंडारी भी शामिल हैं। वहीं राजधानी दून में भी ऐसे कई नेता हैं, जिन्होंने विधानसभा पहुंचने की उम्मीद में अपना क्षेत्र छोड़ा है।
धर्मपुर से लड़ रहे विनोद चमोली रायपुर के वोटर हैं जबकि राजपुर से मैदान में उतरे खजानदास कैंट सीट के वोटर हैं। कैंट से ताल ठोक रहे सूर्यकांत धस्माना का नाम राजपुर रोड विधानसभा में वोटर के रूप में दर्ज है। इसके अलावा पूरे प्रदेश में कई अन्य नेता भी हैं, जिन्होंने विधानसभा तक पहुंचने की उम्मीद में दूसरे क्षेत्रों को चुना है।