नहीं देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। उसने पुलिस को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ऐश्वर्य बोरा की अदालत में पहुंचा, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र गिरधर ने कांता प्रसाद का पक्ष रखा।
मंगलवार को सुनवाई में कोर्ट ने रुद्रपुर कोतवाली पुलिस को एक सप्ताह के भीतर मेयर रामपाल के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की विवेचना करने के आदेश दिए थे। इसके बाद बुधवार को रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने मेयर रामपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।