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उत्तराखंड: राजकीय बाल गृह के आठ कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज, जानिए पूरा मामला

Sat, 04 Nov 2017 10:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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राजकीय बाल गृह (शिशु सदन) तंत्र के पूर्व फार्मेसिस्ट और महिला केयर टेकर समेत आठ कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया है। अपर सचिव समाज कल्याण मनोज चंद्रन की जांच रिपोर्ट में बालक और बालिकाओं के साथ अमानवीय व्यवहार और आपराधिक लापरवाही की पुष्टि हुई थी।
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खासतौर से दो नवजात शिशु की मौत को लेकर तंत्र की भूमिका ज्यादा संदिग्ध पाई गई है। नेहरू कॉलोनी थाने की महिला दारोगा ने शुक्रवार देर रात इस मामले में एफआईआर कराई है।

नारी निकेतन के बाद राजकीय बाल गृह शिशुओं की मौत और बालिकाओं से अमानवीय व्यवहार को लेकर कई माह से सुर्खियों में चल रहा था। सदन तंत्र हर लापरवाही को बड़ी सफाई से पर्दा डालने में कामयाब होता रहा।
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समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव मनोज चंद्रन ने प्रकरण को गंभीरता से लेकर 22 जुलाई और 29 अगस्त को राजकीय बाल गृह का निरीक्षण कर कई पेजों की गोपनीय जांच रिपोर्ट तैयार की थी।

इसमें दो नवजात की मौत में कर्मचारियों की आपराधिक लापरवाही का उल्लेख किया गया। वहीं, पांच अन्य बालिकाआें के मामलों में अमानवीय व्यवहार के साथ जिम्मेदारियों की अनदेखी का उल्लेख किया था। इसी कड़ी में अभियोग पंजीकृत करने के लिए जांच रिपोर्ट नेहरू कालोनी थाने भेजी गई थी।
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पहले हो चुके एसआईटी जांच के आदेश

नेहरू कालोनी थाने की दारोगा आशा पंचम ने इसी रिपोर्ट के आधार पर अपनी जांच कर मुकदमा दर्ज करा दिया, जिसमें राजकीय बाल गृह के पूर्व फार्मेसिस्ट हरिकृष्ण सेमवाल और केयर टेकर रूबिना के साथ मंदा, शांति, दीपा, करन, सुशीला और सरोजनी को आरोपी बनाया है। पूर्व फार्मेसिस्ट हरिकृष्ण सेमवाल अब हरिद्वार में तैनात बताए गए हैं, जबकि संविदा पर आईं महिला केयर टेकर रूबीना, मंदा, शांति और सुशीला अब यहां कार्यरत नहीं हैं। उधर जांच रिपोर्ट देने वाले अपर सचिव मनोज चंद्रन फिलहाल वन विभाग में तैनात हैं।

अपर सचिव समाज कल्याण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर नेहरू कालोनी थाने में राजकीय बाल गृह के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना में आने वाले तथ्यों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- निवेदिता कुकरेती, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

पहले हो चुके एसआईटी जांच के आदेश
प्रमुख सचिव गृह आनंदवर्द्धन शिशु सदन में अमानवीय व्यवहार की जांच को एसआईटी गठित करने के आदेश कई दिन पहले कर चुके हैं, मगर मुकदमा अब जाकर दर्ज हुआ है। अपर सचिव समाज कल्याण मनोज चंद्रन की इसी गोपनीय रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव गृह ने एसआईटी गठित की थी। एसआईटी में राजपत्रित अधिकारियों को शामिल किया गया है।
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