इसके बाद महिला कुछ दिन के लिए गायब हो गई। 22 जून 2015 को महिला एक बच्चे के साथ सामने आई। बताया कि दूसरा बच्चा मृत अवस्था में हुआ था। विश्वास कर समझौते के अनुसार एक बच्चा लेकर ढाई लाख रुपये दे दिए गए। बाद में पता चला कि दूसरा बच्चा भी जीवित है। उनकी धर्मपत्नी ने महिला से बात कर दूसरा बच्चा भी देने को कहा, मगर उसने मना कर दिया।
एक साल में जाकर हुई सुनवाई
दंपति एक साल से दूसरे बच्चे के जीवित होने का दावा करते आ रहे हैं, मगर अब जाकर उनकी बात को सही माना गया। एक बार तो ऋषिकेश कोतवाली पुलिस ने उनकी बात को झुठला कर मामला थाने से ही निपटा दिया था। लेकिन पीड़ित ने हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने एसटीएफ एसएसपी रिद्धिमा अग्रवाल से मिलकर अपनी पीड़ा बताई। अग्रवाल ने टीम गठित कर 2014 के इस मामले को खंगालना शुरू कर दिया। आखिर में दंपति की बात सही साबित हुई। उसी आधार पर एसटीएफ एसएसपी ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।
सरोगेसी से हुए जुड़वा बच्चों के मामले में ऋषिकेश पुलिस ने जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसटीएफ के साथ मंत्रणा कर इस मामले में अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- सरिता डोभाल, पुलिस अधीक्षक देहात