देश में जहां लोग न्यायालयों तक नहीं पहुंच पाते और उन्हें अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी नहीं है उन्हें घर पर ही विधिक जानकारी दी जाएगी।
इसके लिए नॉन प्रोफेसनल लीगल एजूकेशन पैटर्न तैयार किया जाएगा। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि बीसीआई को मिले प्रस्ताव के पास नियमावली में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
दून पहुंचे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने कहा कि देश में ऐसे लोग तैयार किए जाएंगे जो पंचायत स्तर तक लोगों को उनके कानूनी अधिकार बताएंगे। बीसीआई की ओर से इसके लिए कोर्स तैयार किए जाएंगे। बीसीआई डिप्लोमा कोर्स शुरू करेगी।
विधि विशेषज्ञ स्वेच्छा से इस क्षेत्र में आगे आकर लोगों को जानकारी देंगे। बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के विशेष कमेटी के सदस्य चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि जो लोग कोर्ट तक नहीं जा पाते उनको न्याय के लिए ग्राम न्यायालयों की पहले से व्यवस्था है। मोबाइल अदालतों के जरिये भी न्याय की व्यवस्था है।
जरूरत है सिर्फ लोगों को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी हो। इसके लिए प्रत्येक राज्य में लीगल एजूकेशन एकेडमी खोले जाने का प्रस्ताव है। बीसीआई को अधिकार है कि वे इसमें डिप्लोमा कोर्स भी शुरू कर सकती है।
विधिक जागरूकता को बनेंगे नियम
बीसीआई की ओर से आयोजित दो दिवसीय सेमीनार में विधिविद माधव मेनन की ओर से बीसीआई को पांच बिंदुओं पर प्रस्ताव सौंपा गया है। बीसीआई के चेयरमैन ने कहा कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर नियमावली में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। बीसीआई की ओर से विधिक जागरूकता को लेकर आवश्यक नियम बनाए जाएंगे।