उत्तराखंड के कालाढूंगी के जंगल में ऐसे दरख्त का आप दीदार कर सकते हैं, जिसके तने में अंगुलियां रगड़ें तो उसकी शाखाएं कांपना शुरू कर देती हैं। यह जानकर भले ही आपको हैरानी हो, लेकिन यह सच है।
कालाढूंगी के जंगल में दो और रामनगर के क्यारी जंगल में कांपने वाला वृक्ष मौजूद है। स्थानीय लोग इसे हंसने वाला पेड़ कहते हैं। जंगल विभाग को इस वृक्ष की बहुत जानकारी नहीं है। हालांकि मुख्य वन संरक्षण अनुसंधान एसके सिंह का कहना है कि ऐसा होता है।
पिछले चार साल से कालाढूंगी के दो वृक्षों को कार्बेट ग्राम विकास समिति ने पर्यटन से जोड़ा है। पर्यटकों को घने जंगल में कंपन वाले यह पेड़ दिखाने के लिए बकायदा समिति के गाइड जाते हैं।
कालाढूंगी में इसे थनेला के नाम से जाना जाता है। जबकि इसका वानस्पतिक नाम ‘रेंडिया डूमिटोरम’ है। रूबीएसी कुल का यह सदस्य करीब 300 से 1300 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है।
दिसंबर से जनवरी तक का समय पेड़ों में फल आने का रहता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे मेनफल, मिंदा, राधा और मदनफल का भी नाम दिया गया है।