उत्तराखंड में विभिन्न संस्कारों में गाए जाने वाले मांगलिक गीत जिन्हें मांगल भी कहा जाता है, जो देवभूमि की गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक है। इन्हें सुनकर हर कोई भाव विभोर हो सकता है।
संगीत क्षेत्र के लिए लता मंगेशकर का निधन बहुत बड़ी क्षति
लोकगायिका कल्पना चौहान ने बताया कि आज भी वह मुलाकात उन्हें याद है जैसे मानों कि कल की बात हो। बकौल कल्पना स्वर कोकिला से वह मुलाकात बेहद छोटी थी लेकिन वह ईश्वर से मुलाकात करने जैसा था। बताया कि साल 1984 में वह जब कक्षा 12वीं में पढ़ती थी तो एक पहाड़ी और राजस्थानी गीत की रिकॉर्डिंग के लिए मुंबई स्टूडियो में अपने ग्रुप के साथ गई थी।
ग्रुप के साथ जिस स्टूडियो में मांगल गीत रिकॉर्ड कर रही थी उसके अगले स्टूडियो में स्वर कोकिला लता मंगेशकर अपने गानों की रिकॉर्डिंग कर रही थी। जैसे ही उनके कानों में मांगल गीत की ध्वनि पड़ी तो वह खुद को रोक नहीं सकीं और हमारे स्टूडियो आ गईं। लता दीदी को देखकर सभी हतप्रभ रह गए कि स्वरों की देवी खुद आई हैं।
उन्होंने गीत गाने वाले सभी बच्चों की तारीफ की और संगीत में आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया। कल्पना ने मुंबई से ही पढ़ाई करने के बाद संगीत की बारीकियां सीखीं। उन्होंने लता दीदी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि संगीत क्षेत्र के लिए उनका निधन बहुत बड़ी क्षति है।