श्रीराम के जयकारों और आतिशबाजी की चकाचौंध के बीच शुक्रवार को देहरादून में बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकरण और मेघनाद का दहन हुआ। इस मौके पर कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
बच्चों में नजर आया उत्साह
रावण दहन के लिए सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में नजर आया। गली-मोहल्लों में उन्होंने रावण के पुतलों का दहन कर खुशियां मनाई। दस दिन तक चली रामलीला का उत्साह शुक्रवार को विजयदशमी को चरम पर पहुंचा। शहर के विभिन्न हिस्सों में रावण दहन किया गया।
लक्ष्मण चौक रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी की ओर से शाम साढ़े सात बजे रावण, कुंभकरण, मेघनाद के पुतले फूंके गए। यहां मुख्य आकर्षण रामायण पर तैयार नृत्य नाटिका रही। इसमें सीता स्वयंवर, राम-भरत मिलाप, सीता हरण और राम-रावण युद्ध नृत्य मुद्राओं के जरिए पेश किया गया।
लंका विजय पर हाथों में दीये लेकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। इसमें सीता की भूमिका बीना अग्रवाल ने निभाई। इसके अलावा अनीता गुप्ता, दिव्यम, स्वाति और अर्चना ने भी भागीदारी की। मुख्य अतिथि पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, विशेष अतिथि विधायक हरबंस कपूर रहे।
अध्यक्षता आवास एवं विकास परिषद पूर्व अध्यक्ष नरेश बंसल और संचालन उमा संस्था की अध्यक्ष साधना शर्मा ने की। मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ बंसल ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिल्ली और मुंबई के बच्चों ने भी भागीदारी की। यहां डीएम चंद्रेश यादव, एडीजी राम सिंह यादव, अनीता सिंह, तृप्ति जाटव, जगदीश धीमान, विजय मालिक, राजीव जुनेजा आदि रहे।
हनुमान का नृत्य रहा खास
क्लेमेंटटाउन स्थित दशहरा ग्राउंड (मछली तालाब के पास) में शाम साढ़े सात बजे रावण दहन हुआ। इस दौरान हनुमान जी का नृत्य खास आकर्षण रहा।
इससे पहले क्लेमेंटटाउन स्थित श्री रघुनाथ मंदिर से निकली शोभायात्रा के साथ राम जी दशहरा ग्राउंड पहुंचे। आयोजक महेश पांडे ने बताया कि दशहरा मेला दोपहर दो बजे से शुरू हो गया था। मौके पर कृष्ण मोहन जोशी, राजेश मित्तल, भूपेंद्र कंडारी आदि रहे।
खूब भाई रावण की पोशाक
पटेलनगर स्थित रामलीला ग्राउंड में रावण दहन रात साढ़े आठ बजे हुआ। यहां के रावण की पोशाक सभी को खूब भाई। उसका चेहरा और जूतियां खूब सराहे गए। इस दौरान आतिशबाजी ने लोगों को रिझाया। मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सभी को दशहरे की बधाई दी। खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने भी आयोजन की सराहना की।
चीखते राक्षस के मुंह से निकली ज्वाला
झंडा बाजार में रामलीला कला समिति की ओर से लंका दहन किया गया। इस बार लंका की ऊंचाई तीन मंजिला थी। लंका के भीतर खड़ा 35 फुट का रावण देखने लायक रहा। लंका के चारों ओर बनाए राक्षस के चेहरे भी खास थे। आतिशबाजी के साथ पौने आठ बजे लंका दहन किया गया। इससे पहले चीखते हुए राक्षसों के मुंह से आग निकलती दिखाई गई।
पचास गांवों के लोगों का रावण
प्रेमनगर दशहरा ग्राउंड में वर्ष 1947 से रावण दहन हो रहा है। यहां आसपास के 50 गांवों के लोग दहन देखने जुटते हैं। राजधानी का सबसे पुराना रावण प्रेमनगर में ही तैयार किया गया था। यहां बच्चे अपना रावण तैयार कर फूंकते हैं।
शाम 6:05 बजे रावण दहन होते ही बच्चों ने तालियां बजाकर खुशियां मनाईं। इससे पहले शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सूरज भाटिया, राजीव पुंज, विक्की खन्ना, विनोद, महेश, अनिल ने सहयोग किया।
कैंट युवा सेवा समिति ने निकाली शोभायात्रा
कैंट युवा सेवा समिति ने रावण दहन से पहले भव्य शोभायात्रा निकाली। गढ़ी कैंट चौक से शुरू हुई यात्रा टपकेश्वर मंदिर में पूरी हुई। यहां रावण दहन साढ़े छह बजे किया गया। विधायक गणेश जोशी ने सभी को विजयादशमी की बधाई दी।
कार्यक्रम में आचार्य बिपिन जोशी, महेंद्र सिंह पाल, राजेश आदि ने सहयोग किया। राधा कृष्ण मंदिर दिलाराम किशनपुर की ओर से भी रावण दहन किया गया। जीएमएस रोड स्थित इंदिरापुरम में बच्चों ने छोटा रावण बनाकर रात आठ बजे दहन किया।