पशुलोक, ऋषिकेश और पथरी में रह रहे टिहरी के विस्थापितों को जल्द ही भूमिधर अधिकार मिलेगा। इसको लेकर एक सप्ताह के भीतर सिंचाई और राजस्व विभाग के अधिकारियों की समन्वय बैठक बुलाकर पुनर्वासितों को भूमिधर अधिकार प्रदान करने संबंधी कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्देश सोमवार को प्रदेश के पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने टिहरी बांध परियोजना के पुनर्वासित विस्थापितों के पुनर्वास एवं अवस्थापना सुविधाओं की बेहतरी के लिए बुलाई गई बैठक में दिया।
टिहरी विस्थापितों को देहरादून वन प्रभाग के पशुलोक स्थित वीरभद्र वन ब्लॉक में और हरिद्वार के पथरी वन ब्लॉक में जमीन आवंटित की गई थी। लेकिन इन लोगों को भूमिधर अधिकार नहीं मिला। ऐसे में ये लोग न तो बैंक ऋण ले पाते हैं और न ही पंचायत चुनाव में भागीदारी कर पाते हैं। साथ ही सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ भी नहीं उठा पाते हैं।
कई सालों से कर रहे थे मांग
भूमिधर अधिकार प्रदान किए जाने की मांग विस्थापित लोग कई सालों से करते आ रहे थे। वन विभाग द्वारा इस जमीन को लीज मुक्त भी कर दिया गया है। इसको देखते हुए पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने बैठक बुलाकर अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजस्व सचिव की अध्यक्षता में एक सप्ताह के भीतर सिंचाई और राजस्व की समन्वय बैठक बुलाई जाए।
बैठक में टिहरी बांध परियोजना के पुनर्वास निदेशक, देहरादून और हरिद्वार के डीएम, देहरादून के अधीक्षण अभियंता पुनर्वास और देहरादून तथा हरिद्वार के प्रभागीय वन अधिकारियों को बुलाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के 29 अगस्त 2006 के निर्णय का अनुपालन कराते हुए पशुलोक एवं पथरी में टिहरी बांध विस्थापितों को भूमिधर अधिकार प्रदान करने की दिशा में कार्रवाई की जाए। उन्होंने अवशेष भूमि जो टीएचडीसी के नाम है को ग्राम सभा में हस्तांतरित करने की दिशा में भी कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में सचिव सिंचाई आनंद वर्द्धन, अधिशासी अभियंता पुनर्वास, निदेशक पंचायती राज, निदेशक पशुपालन सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।