अखिल गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने पहाड़ में बाहरी लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर रही जमीन की खरीद फरोख्त पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग लालच में पड़कर अपनी पुश्तैनी जमीनें बेच रहे हैं।
शनिवार को आयोजित गोष्ठी में संयोजक अब्बल सिंह नेगी ने कहा कि राज्य में समय-समय पर लागू हुए भूमि सुधार कानूनों के तहत भूमि की खरीद-फरोख्त की सीमा घटती-बढ़ती रही है। वकील अरुण सक्सेना ने कहा कि सरकारों ने कानूनों में जानबूझकर ऐसे पेंच छोड़ दिए, जिससे खुलकर जमीन की खरीद फरोख्त हुई।
वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट व जय सिंह रावत ने कहा कि खेती की जमीन बेचने के कारण किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं। पूर्व नौकरशाह एसएस पांगती ने हिमाचल की तर्ज पर भूमि सुधार अधिनियम लागू करने की मांग की। इस अवसर पर रोशन धस्माना, गजेंद्र भंडारी, संतोष गैरोला, वीरेंद्र असवाल, गीता गैरोला, नत्था सिंह पवार, जयदीप सकलानी आदि मौजूद रहे।
समिति का किया गठन
भू अध्यादेशों के कारण हो रहे अन्याय के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए एक समिति का भी गठन किया गया। इसमें अब्बल सिंह नेगी, निर्मला बिष्ट, धीरज सिंह नेगी, समीर मुंडेपी, प्रदीप कुकरेती, अंबुल वर्मा को शामिल किया गया। वहीं सलाहकार समिति में एसएस पांगती, जयसिंह रावत, अरुण सक्सेना, एसएस रावत व विवेक पैन्यूली को शामिल किया गया है।