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Dehradun News: तोड़ने से पहले मांगे गए भू-दस्तावेज, नहीं देने पर दून अस्पताल ने उठाया कदम

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दून अस्पताल परिसर में बनी मजार को रातों-रात नहीं तोड़ा गया। मजार को तोड़ने से पहले जिला प्रशासन ने कई बार धर्मस्थल के संरक्षकों को नोटिस भेजा। नोटिस भेजकर प्रशासन ने पूछा कि यदि मजार की जमीन से संबंधित कोई भू दस्तावेज संरक्षकों के पास हों तो उपलब्ध कराएं, लेकिन कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद दून अस्पताल के अनुरोध पर जिला प्रशासन ने सुरक्षा बल उपलब्ध कराया और मजार को ध्वस्त कर दिया गया।
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जिला प्रशासन के अनुसार मजार को लेकर लगातार कई लोग शिकायती पत्र दे चुके थे, कहा जा रहा था कि मजार का निर्माण बगैर अनुमति के किया गया है। दून अस्पताल प्रशासन की ओर से भी कहा गया था कि मजार का निर्माण अस्पताल की जमीन पर बिना अनुमति किया गया है। इसका संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने जांच कराई। जांच में मजार के दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया, लेकिन कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने मजार को परिसर से हटाने का निर्णय लिया। जिला प्रशासन व पुलिस ने सुरक्षा उपलब्ध कराई।



Iमजार की न तो अनुमति थी, ना दस्तावेज : डीएम
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सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक संस्थाओं के निर्माण से पूर्व कलेक्टर की अनुमति लेनी आवश्यक होती है। ऐसा करने के लिए, धार्मिक संस्थाओं को स्थानीय प्रशासन को भू स्वामित्व के दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। अधिनियम 2016 के अनुसार, ऐसा करना जरूरी है। यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी धार्मिक संस्था सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध रूप से निर्माण न करे। यह कानून सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने और किसी भी विवाद से बचने में मदद करता है। मजार के निर्माण के लिए ना तो कोई अनुमति ली गई थी, ना ही कोई दस्तावेज दिखाए जा सके। -सविन बंसल, डीएम, देहरादून
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