देहरादून से 125 किमी दूर यमुना किनारे मौजूद लाखामंडल महाभारत काल की याद दिलाता है। महाभारत के समय में पांडवों ने अपने वनवास का कुछ समय यहां बिताया था।
पाडंवों ने यहां छिपने के लिए लाख का महल 'लाक्षागृह' बनाया था। यहां से बचकर भागने के लिए पांडवों ने सुरंग बनाई थी। कहा जाता है कि यह सुरंग हस्तिनापुर तक पहुंचती है। इसे सुरक्षा कारणों को देखते हुए अब बंद करवा दिया गया है।
शिव की लाखों मूर्तियां
चकराता से 60 किमी. दूरी पर स्थित इस जगह का नाम लाखामंडल रखने का एक कारण यह भी है कि यहां शिव की लाखों मूर्तियां मिलती हैं। दो फुट की खुदाई करने से ही यहां हजारों साल पुरानी कीमती मूर्तियां निकल आती हैं। इसी कारण इस स्थान को आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की निगरानी में रखा गया है।
इसी कारण लाखा मंडल में नए निर्माण पर रोक लगाया गया है। परिस्थितियों के मुताबिक कभी भी इस जगह को खाली करवाया जा सकता है।
लाखा मंडल में करोड़ों साल पुराना शिवलिंग है। जिस पर जलाभिषेक करने पर आपकी सूरत उस पर दिखाई देती है। कहा जाता है कि जब सृष्टि का निर्माण हुआ तभी से ये शिवलिंग लाखामंडल में स्थापित है। जो लोगों सब पाप हर लेता है।
लाक्षागृह गुफा के अंदर स्थित शेषनाग के फन के नीचे प्राकृतिक शिवलिंग के ऊपर टपकता पानी यहां की खासियत है।