व्यासी जलविद्युत परियोजना के लिए ग्राम जुड्डो में बनाए गए बांध में भारी मात्रा में जमा हुए कूड़े ने झील के पानी को ढक दिया है। यमुना के बहाव के साथ बहकर आए इस कूड़े ने जलविद्युत निगम के भी होश उड़ा दिए हैं।
व्यासी जलविद्युत परियोजना के बांध में जमा हुए कूड़े में वृक्षों के तनो से लेकर छोटी टहनियां, व्यापक स्तर पर प्लास्टिक से बनी बोतल, पॉलीथिन, बैग, चिप्स व इस प्रकार के अन्य सामान के रैपर समेत सभी प्रकार का जैविक व अजैविक कूड़ा शामिल है। कूड़े की मात्रा का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि बांध की झील में मौजूद पानी के ऊपर इस कूड़े ने पूरी एक परत चढ़ा दी है, जिससे पानी भी दिखाई नहीं दे रहा है। बरसात के मौसम में पानी के साथ बहकर आ रहा यह कूड़ा जलविद्युत निगम के अधिकारियों की परेशानी को भी बढ़ा रहा है। बताते चलें कि बांध में आने वाले कूड़े को पानी से निकालने के लिए जलविद्युत निगम ने बांध के एक कोने पर क्रेशरैक मशीन लगाई हुई है लेकिन कूड़े की मात्रा के सामने यह मशीन बौनी दिखाई दे रही है।
यमनोत्री तक से आता है यमुना में कूड़ा
यमनोत्री ग्लेशियर से निकलने वाली यमुना नदी जानकी चट्टी, हनुमान चट्टी, बदिया, रानाचट्टी, स्यानचट्टी, बड़कोट, नौंगांव, लाखामंडल, डामटा, नैनबाग, यमुना ब्रिज होते हुए लखवाड़ व इसके बाद जुड्डो पहुंचती है। बांध बनने से पहले यमुना का पानी अविरल बहता था तो इस कूड़े का अंदाजा नहीं होता था। ऐसा पहली बार हुआ है कि यमुना में बहने वाला यह सारा कूड़ा जुड्डो स्थित बांध पर रुक गया है और आने वाले दिनों में भी इस कूड़े की बांध से आगे जाने की उम्मीद नहीं है।
बांध की झील में आए कूड़े को निकालने के लिए क्रेशरैक मशीन को निरंतर चलाया जा रहा है। इसके साथ ही बरसात में यमुना में बहकर आए कूड़े को लेकर एक खाका भी तैयार किया जा रहा है। पेड़-पौधे, पत्ते व तने आदि प्राकृतिक कूड़े को छोड़कर यदि व्यापारिक प्रतिष्ठानों व ग्रामीण इलाकों से निकलने वाले कूड़े की अधिक मात्रा होगी तो इस संबंध में सभी शहरों व ग्रामों के निवासियों को जागरूक करने के लिए निगम के माध्यम से अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा कूड़े के निस्तारण व बांध से निकालने के लिए भी मात्रा के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। - हिमांशु अवस्थी, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, जलविद्युत निगम