गेंहू, सरसों और बागवानी फसलें हो रही प्रभावित
कृषि निदेशक के मुताबिक सभी जिलों से मांगी जाएगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश में पिछले कई दिनों से बारिश न होने से गेहूं, सरसों और बागवानी की फसलों को नुकसान हो रहा है। कृषि निदेशक दिनेश कुमार के मुताबिक फसलों में पड़ रहे प्रभाव की सभी मुख्य कृषि अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी।
गेहूं की बुवाई का सही समय अक्तूबर के अंत से नवंबर के मध्य (5-25 नवंबर) तक होता है। खासकर इसके लिए 10-20 नवंबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है, गेहूं की बुवाई के 20 से 21 दिन बाद उसमें सिंचाई की जरूरत होती है लेकिन गेहूं की बुवाई के बाद दोगुना समय बीतने के बाद भी बारिश नहीं हुई। गेहूं, सरसों, सेब, मटर आदि फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। बारिश न होने से नमी की कमी और पाले के कारण पौधों की बढ़वार रुक गई है, पत्तियां सूख रही हैं और उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कृषि विभाग के निदेशक दिनेश कुमार बताते हैं कि समय पर बारिश न होने से असिंचित क्षेत्रों में फसलों को नुकसान हुआ है।
बर्फ न पड़ने से सेब की फसल को भी नुकसान
बर्फबारी न होने से सेब की चिलिंग रिक्वायरमेंट पूरी नहीं होती, जिससे फूलों का विकास रुक जाता है, फल कम लगते हैं, गुणवत्ता घटती है। समय से पहले फूल खिल सकते हैं जो पाले से नष्ट हो जाते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सेब के पेड़ों को 0-7°C के बीच 800-1600 घंटों की ठंडक (चिलिंग ऑवर) चाहिए होती है। समय पर बर्फ न पड़ने से जो नहीं मिल पाती, बर्फ न पड़ने से सेब की फसल को भी नुकसान हो रहा है।