डीएनए जांच भी आठ से 10 महीने तक की लंबित
दुष्कर्म आदि के मामलों में यह जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। अभी तक डीएनए जांच केवल देहरादून स्थित फोरेंसिक लैब में ही की जा रही थी। लेकिन, पिछले दिनों इसकी व्यवस्था रुद्रपुर लैब में भी कर दी गई है। मगर, स्थिति यह है कि अब भी आठ से 10 माह तक की डीएनए जांच लंबित चल रही हैं। हालांकि, अब दोनों मंडलों के काम बांट दिए गए हैं। गढ़वाल के देहरादून में और कुमाऊं के रुद्रपुर लैब में काम देखे जा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों जगह काम होने से इन लंबित जांचों की अवधि को जल्द ही तीन से चार माह के बीच कर दिया जाएगा।
कंप्यूटर फोरेंसिक के उपकरण मौजूद, विशेषज्ञ नहीं
केंद्रीय फोरेंसिक लैब चंडीगढ़ पर निर्भरता कम करने के लिए पिछले दिनों उत्तराखंड में भी कंप्यूटर साइबर फोरेंसिक जांच की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए उपकरणों की खरीद कर इन्हें लैब में स्थापित भी कर दिया गया। लेकिन, विशेषज्ञों की कमी बदस्तूर जारी है। पिछले साल लोक सेवा आयोग के माध्यम से साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए भर्ती निकाली गई थी। मगर इस भर्ती में कोई योग्य उम्मीदवार नहीं मिल सका था। लिहाजा, लैब प्रबंधन ने पुलिस की दो महिला दरोगाओं को साइबर फोरेंसिक के लिए तैयार किया है। फिलहाल थोड़ा बहुत काम यही दोनों महिला दरोगा देख रही हैं।
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रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा नए कानूनों के तहत जो व्यवस्थाएं होनी हैं उनकी तैयारियां भी की जा रही हैं। शासन को इसके संबंध में भी अवगत कराया गया है। जल्द ही शासन से सकारात्मक दिशा निर्देश मुख्यालय को प्राप्त होने की उम्मीद है। -डॉ. नीलेश आनंद भरणे, प्रवक्ता उत्तराखंड पुलिस