‘कितना बदनसीब है ‘जफर’ दफ्न के लिए, दो गज जमीं न मिली कू-ए-यार में’ अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर ने रंगून की जेल से लिखी इन पंक्तियों से अपना दर्द दुनिया तक पहुंचाया। लेकिन, गरीब और अनपढ़ मजदूर की आवाज अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस गुम है। ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी करने वाला मजदूर बेघर है। एकड़ों जमीन में पसीना बहाने वाला मजदूर अनाज को तरस रहा है। कारखानों में 12 से 16 घंटे की ड्यूटी करके भी घर का खर्च चलाने जितना पैसा नहीं कमा पा रहा है।
रविवार को बरेली रोड और हल्द्वानी मंडी समिति के गेट सामने ठेकेदार की बाट जो रहे श्रमिकों में मजदूर दिवस को लेकर कोई उत्साह नहीं था। राज मिस्त्री का काम करने वाले अतीक का कहना था कि वह अब तक कितनी ही ऊंची-ऊंची इमारतें बना चुका है, लेकिन अपने लिए एक छोटा सा मकान नहीं बना पाया। आज भी इंदिरानगर में किराये के मकान में रहता है।
श्रमिक शकील अहमद ने कहा कि मजदूरों को 300 रुपये की दिहाड़ी भी बड़ी मुश्किल से मिलती है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का कोई खैरख्वाह नहीं रह गया है। पेंटर शादाब ने कहा कि श्रम मंत्रालय और श्रम कार्यालयों के अधिकारी और मजदूर संगठनों के नेता मजदूर हित में बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं। राज मिस्त्री जाकिर ने कहा कि राज मिस्त्री का काम बेहद रचनात्मक है, लेकिन उन्हें पर्याप्त पैसा नहीं मिलता, इससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं हो पाती।
भाजपा और कांग्रेस से जुड़े संगठन करेंगे कार्यक्रम
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के जिलाध्यक्ष मदन सिंह गैरा कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर नैनीताल और हल्द्वानी में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें मजदूर समस्याओं पर गहन चिंतन किया जाएगा। राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश उपाध्यक्ष एचआर बहुगुणा ने कहा कि एक मई को सिडकुल में संगठित व असंगठित क्षेत्र के मजदूर प्रभात फेरी निकालेंगे। उन्होंने कहा कि इंटक मजदूर हितों को लेकर प्रतिबद्ध है।