फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'कुंजवाल ने रिश्वत की तरह बांटा सरकारी पैसा'

Fri, 21 Oct 2016 10:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • लुभाने में खर्च कर दिया 90 फीसदी बजट
  • भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने विधानसभा अध्यक्ष पर लगाया आरोप
विज्ञापन
गोविंद कुंजवाल - फोटो : file photo
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पर रिश्वत की तरह सरकारी पैसा बांटने का आरोप लगाया गया है। विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने इसे अपने चुनाव क्षेत्र में रिश्वत की तरह बांटा है। 
विज्ञापन


इस कोष का 90 फीसदी हिस्सा उन्होंने अपने क्षेत्र के मतदाताओं को लुभाने में खर्च कर दिया। वे भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे। 

चौहान ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में आरटीआई के जरिए सूचना हासिल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 

दस्तावेज की प्रति दिखाते हुए कहा कि कुंजवाल ने बीते चार साल के दौरान कुल 35251 लोगों को अपने विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दी है। 

यह धनराशि पांच सौ से पांच हजार के बीच है। इनमें से करीब 33 हजार लोग उनके चुनाव क्षेत्र जागेश्वर के हैं। उनका यह कार्य ‘मिस यूज आफ आफिस’ की श्रेणी में आता है। 

वित्तीय मामलों में अनियमितता की इजाजत तो विधानसभा अध्यक्ष को भी नहीं है। उन्होंने मांग की कि करोड़ों रुपये की बंदरबांट करने पर कुंजवाल से इस धन की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा किया जाना चाहिए। 
विज्ञापन


मिलीभगत कर लूट रहे सरकारी खजाना
वे शायद भूल गए कि वे केवल एक ही विधानसभा क्षेत्र के लिए नहीं हैं बल्कि पूरे प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल मिलीभगत कर सरकारी खजाने को लूट कर रहे हैं। 

एक अन्य सवाल के जवाब में चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत लोकायुक्त के लिए दागदार लोगों को लाना चाहते हैं जो कि उनको हर मामले में क्लीन चिट देते रहें। जिससे कि उनके भ्रष्टाचार पर पर्दा पड़ा रहे। 
विज्ञापन

कुंजवाल ने किया बचाव, कहा नियमानुसार बांटा गया है धन

गोविंद सिंह कुंजवाल - फोटो : file photo
आरोपों पर पलटवार करते हुए विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लोग न तो काम करते हैं और न दूसरों को करने देते हैं। उनके पास कोई मुद्दा नहीं बचा है इसलिए ऐसे आरोप लगा रहे हैं। 

विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग का आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इसे नियमानुसार ही बांटा गया है। इसके साथ उन्होंने स्वीकार किया कि उनके चुनाव क्षेत्र के लोगों को इसका ज्यादा लाभ दिया गया। 

25 लाख रुपये विधानसभा उपाध्यक्ष का हिस्सा
कुंजवाल ने बताया कि वर्तमान में विवेकाधीन कोष दो करोड़ रुपये सालाना है। इसमें 25 लाख रुपये विधानसभा उपाध्यक्ष का भी हिस्सा रहता है। 

जब उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब यह महज 65 लाख ही था। इसे क्रमश: एक करोड़, फिर डेढ़ करोड़ और अब दो करोड़ किया गया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें