राजेंद्र, प्रबंधक भूमा निकेतन उत्तरी हरिद्वार
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मुझे याद है कि सप्तऋषि क्षेत्र में पहले नदी का किनारा पूरी तरह खाली रहता था। आज बंधे और नदी के बीच फ्लैट बनकर तैयार हो गए। प्रमाण के साथ कह रहा हूं कि जिन स्थानों पर आज कब्जे किए गए वह राजनीतिक लोगों के प्रश्रय में किए गए। जहां पहले कुंभ मेला भरता था आज वहां महल हैं।
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सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की अनदेखी और उत्तराखंड शासन की निष्क्रियता का परिणाम है कि मौजूदा समय में इस धर्मनगरी के स्वरूप को बर्बाद किया जा रहा है। अवैध तरीके के कारोबार उन जगहों पर हो रहे हैं, जिन जगहों पर कभी धर्म और आध्यात्म का बोलबाला था। शासन और प्रशासन से ही नहीं संतों से निवेदन है कि वह धर्मनगरी के स्वरूप को संरक्षित करें। -राजेंद्र, प्रबंधक भूमा निकेतन उत्तरी हरिद्वार