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महाकुंभ 2021: महंत हठ योगी ने संन्यासी अखाड़ों पर फोड़ा ठीकरा, कहा- स्वार्थ के लिए संन्यासियों ने जनता को महामारी में झोंका 

Fri, 16 Apr 2021 10:11 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • दिगंबर अणि अखाड़े के महंत एवं अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रवक्ता बाबा हठ योगी ने कहा कि अप्रैल 2022 तक बृहस्पति कुंभ राशि में हैं तो कुंभ कराने की क्या जल्दी थी। सांकेतिक स्नान कर महामारी से बच सकते थे।
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महंत हठयोगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाकुंभ में कोरोना संक्रमण फैलने से बैरागी अखाड़ों ने संन्यासी अखाड़ों के सिर ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया है। दिगंबर अणि अखाड़े के महंत एवं अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रवक्ता बाबा हठ योगी ने कहा कि संन्यासी अखाड़ों ने अपने स्वार्थ के चलते जनता को महामारी में झोंका है। 11 अप्रैल 2022 तक बृहस्पति कुंभ राशि में है। 14 अप्रैल 2022 को मेष राशि में सूर्य आ रहा है। ऐसे में इस साल जल्दी क्या थी। सांकेतिक स्नान कर महामारी से बचा जा सकता था।

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श्री निरंजनी और आनंद अखाड़े में 17 अप्रैल को कुंभ समापन की घोषणा पर बाबा हठ योगी ने कहा कि उनका व्यक्तिगत निर्णय है। निरंजनी और आनंद अखाड़े के संतों को शायद इतिहास और कुंभ अवधि का पता नहीं है। 14 अप्रैल के शाही स्नान के बाद संन्यासियों के छावनियां खाली होने लगती हैं, लेकिन बैरागी अपनी परंपरा के अनुसार नेत्र पूर्णिमा का स्नान करते हैं। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व महामारी की चपेट में है। हरिद्वार ही नहीं देशभर में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं।
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हठ योगी ने आरोप लगाया कि महामारी से बचा जा सकता था, लेकिन संन्यासी अखाड़ों ने अपने स्वार्थ के कारण महामारी को आमंत्रित किया। संन्यासियों की अदूरदर्शिता के चलते ही भयानक दृश्य सामने आने लगा है। इसमें अखाड़ा परिषद की नाकामी भी सामने आई है। जिद के कारण समाज को खतरे में डालना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि रही बात बैरागी अखाड़ों के चैत्र पूर्णिमा स्नान करने की, इसे लेकर तीनों अणियों के संत अपनी रणनीति बनाएंगे और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेंगे।

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परंपरा का निर्वहन होना चाहिए, कोविड पालन जरूरी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि कुंभ किसी संस्था या व्यक्ति के कहने-बोलने से नहीं होता। उन्होंने बैरागियों के आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा कि मत अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी एक परिवार के सदस्य हैं। कुंभ अपनी अवधि तक होना चाहिए। परंपराओं से खिलवाड़ ठीक नहीं है। विधि-विधान से पूजन और अनुष्ठान होने चाहिए। इन सबके बीच कोविड से बचाव भी बेहद जरूरी है।

सरकार की गाइडलाइन का सख्ती से पालन और संतों एवं श्रद्धालुओं को जागरूक कराया जाना जरूरी है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के स्वास्थ्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शनिवार को वह एम्स से हरिद्वार पहुंच जाएंगे। बैरागियों की ओर से लगाए संन्यासी अखाड़ों से कोरोना फैलने के आरोपों पर महंत ने कहा कि जहां कोविड जांच होगी, वहीं से मरीज भी आएंगे। जांच नहीं होगी तो नहीं आएंगे।

26 मई के बाद हरिद्वार छोड़ेंगे संत
जूना अखाड़े के महंत नारायण गिरि ने कहा कि हरिद्वार महाकुंभ में अभी चार स्नान बाकी हैं। जूना अखाड़ा 26 मई तक कुंभ मनाएगा। कुंभ की अपनी परंपराएं हैं, जिसका संत पालन करेंगे। कुंभ किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि हजारों, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का उत्सव है। अखाड़े के संत कुंभ अवधि पूरी होने के बाद ही हरिद्वार से जाएंगे। कोविड से बचाव के लिए संतों की जांच कराई जा रही है। कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। कोविड जांच की रिपोर्ट आने तक संत आइसोलेट हैं।
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