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कुमाऊं विवि के कुलपति का इस्तीफा हुआ मंजूर, जानिए इस्तीफा देने के पीछे क्या था कारण

Wed, 15 May 2019 08:24 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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प्रो. डीके नौड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
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पांच दिन के सस्पेंस के बाद मंगलवार को राज्यपाल बेबीरानी मौर्य ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल का इस्तीफा मंजूर कर लिया। नौ मई को देहरादून में कुलपति ने राजभवन को इस्तीफा सौंप दिया था। तब से इस्तीफा मंजूर होने, नामंजूरी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था। सभी चर्चाओं पर अब विराम लग गया है। शाम को कुलपति भावुक माहौल में अपने स्टाफ से मिले और शुभकामनाएं दीं।

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नौ मई को प्रो. नौड़ियाल ने आईआईटी रुड़की में उन्हें आवंटित आवास को खाली करवाने का हवाला देकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपा था। कुलपति ने कहा था कि काफी दिनों से पत्राचार के बाद भी आवास के मामले में फैसला न हो पाने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया है।


प्रो. नौड़ियाल अप्रैल 2017 में विवि के कुलपति बने थे। इससे पहले वह आईआईटी रुड़की में वरिष्ठ प्राध्यापक थे। अप्रैल में उन्होंने बतौर कुलपति कुविवि में दो साल पूरे कर लिए थे। उनका 11 माह का कार्यकाल बाकी था, लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्होंने नौ मई को इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफा देने की सूचना विवि प्रशासन को दस मई को मिली तो सभी आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद विवि के गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

 

किसी ने कहा कि कुलपति पर इस्तीफे के लिए ऊपरी दबाव था। किसी ने कहा कि उनकी शिकायतें की गईं थीं और किसी ने कहा कि वह आईआईटी रुड़की के आवास को लेकर चिंतित थे। इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। पांच दिन तक चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। इस्तीफे की मंजूरी को लेकर बुद्धिजीवियों में लंबी बहस चली। किसी ने कहा कि राज्यपाल उनका इस्तीफा मंजूर करेंगी तो किसी ने कहा कि कुलपति अपना 11 माह का शेष कार्यकाल भी पूरा करेंगे।

 

उनका इस्तीफा नामंजूर नहीं किया जाएगा। मंगलवार दोपहर को उनका इस्तीफा मंजूर होने की खबर आने के बाद सभी चर्चा पर विराम लग गया। नए कुलपति की तैनाती को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। फिलहाल चार लोगों के नाम चर्चा में हैं। इनमें प्रो. एनएस बिष्ट, प्रो. चारु चंद्र पंत, प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, प्रो. एसपीएस मेहता का नाम शामिल है।

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नए वीसी के सामने कई चुनौतियां भी होंगी। फिलहाल स्थायी वीसी की तैनाती मुश्किल है। विवि सूत्रों का कहना है कि नए वीसी की स्थायी तैनाती में कम से कम छह महीने का समय लगेगा। इस अवधि में विवि में कार्यवाहक कुलपति की ही तैनाती रहेगी। नए वीसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्र को नियमित करना होगा क्योंकि परीक्षाएं पिछड़ रहीं हैं। लोकसभा चुनाव की मतगणना के कारण एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में परीक्षाएं देर से शुरू और खत्म होंगी।

 

ऐसे में जाहिर है कि परीक्षा परिणाम और अगला सत्र भी पिछड़ जाएगा। इसके साथ ही अक्तूबर में दीक्षांत समारोह होना है। पिछले दिनों हुई ईसी की बैठक में इस पर सहमति बन चुकी है कि समारोह के लिए राष्ट्रपति को बुलाया जाना है। दीक्षांत समारोह और राष्ट्रपति को आमंत्रित करने संबधी प्रक्रिया भी नए वीसी से सामने चुनौती होगी। नैक का मूल्यांकन भी नए वीसी के सामने एक चुनौती होगी।

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