वहीं रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त की रात्रि 11:46 बजे से शुरू होकर 25 अगस्त सुबह 4:17 बजे तक रहेगा। भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में रात्रि 12 बजे हुआ था, इसलिए दोनों दिन रोहिणी नक्षत्र है।
उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी का व्रत रखने से मनुष्य के पापों का नाश होता है। मन में सरस्वती का वास होता है और घर में धन धान्य की बरकत होती है।
कंस के अत्याचार से परेशान गृहस्थ धर्म के लोगों ने मथुरा में पहले से व्रत रखा था। भगवान श्रीकृष्ण का रात्रि को जब जन्म हो गया तो उन्होंने दूसरे दिन उत्सव मनाया।
जबकि संतों और महात्माओं की समाधि भगवान के जन्म पर टूटी, इसलिए उन्होंने दूसरे दिन इस व्रत को रखा। इसे व्रत राज भी कहा जाता है।
घिल्डियाल बताते हैं कि विभिन्न राशि के लोगों को अलग-अलग सामग्री से भगवान कृष्ण का पूजन करना चाहिए।
मेष राशि के लोग मोर पंख और बूंदी के लड्डू, वृषभ राशि के लोग मक्खन और मिश्री से, मिथुन राशि वाले सफेद तिल के लड्डू से, कर्क राशि के लोग दूध और दही से, सिंह राशि वाले पीले फूल से, कन्या राशि के लोग दूध-दही से, तुला राशि वाले सफेद फूल और तुलसी से, वृश्चिक राशि के लोग लाल फूलों से, धनु राशि वाले गोधूम चूर्ण और पीले फूलों से, मकर राशि वाले लोग काले तिल और गुड़हल के फूलों से, कुंभ राशि वाले बांसुरी, मोर पंख एवं काले तिलों से और मीन राशि के लोग गोधूम चूर्ण, पीले फूल तथा फलों से भगवान का पूजन करें तो मनवांछित फल की प्राप्ति होगी।