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Dehradun News: मां के साथ दौड़ीं कृषिता, जीता खिताब

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कृषिता की उम्र महज साढ़े सात वर्ष है और जिद ऐसी कि मुझे तो बस दौड़ना है। फिर क्या था मां ने कहा ठीक है, चलो साथ दौड़ेंगे। बात बन गई और फिर कृषिता ने अपनी माता के साथ तीन किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के साथ शौर्य रन का खिताब जीत लिया। जानकर हैरानी होगी 350 धावकों में कृषिता अकेली दृष्टि दिव्यांग धावक थी जो अपनी मां का हाथ पकड़कर दौड़ रही थी। यह दौड़ एक कंपनी व मॉल की ओर से आयोजित की गई थी। कृषिता राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी) के आदर्श विद्यालय में कक्षा तीन की छात्रा है। कृषिता के पिता भारतीय थल सेना में अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हैं और अब एक बैंक में कार्यरत हैं। संस्थान के कोच नरेश सिंह नयाल ने बताया, कृषिता के माता-पिता उसे खेल में भाग लेने के लिए समय-समय पर प्रोत्साहित करते हैं।कृषिता पूर्णतः दृष्टि दिव्यांग है और उसका सपना पैरा स्पोर्ट्स में देश के लिए खेलना है। उसकी इस उपलब्धि पर सोमवार को विद्यालय में उसे सम्मानित किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य अमित शर्मा ने कहा, कृषिता ने अपने हुनर और जज्बे से दूसरे विद्यार्थियों को न सिर्फ प्रोत्साहित किया बल्कि संस्थान का मान भी बढ़ाया।
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