सरकार किसी भी समय कोटद्वार-ऋषिकेश बोर्ड को भंग कर सकती है। नगर निगम बनने जा रहे कोटद्वार और ऋषिकेश नगर पालिका परिषद के निर्वाचित बोर्ड को सरकार अब किसी भी वक्त भंग कर सकती है। सरकार ने इस संबंध में विधिक राय समेत अन्य औपचारिकताओं को लगभग पूरा कर लिया है।
इसके बाद, इन दोनों नगर निकायों की व्यवस्था के संचालन के लिए प्रशासकों की नियुक्ति कर दी जाएगी। इन स्थितियों के बीच, सीमा विस्तार की प्रक्रिया से गुजर रहे नगर निकायों के बोर्डों के संबंध में अभी सरकार को विधिक राय प्राप्त नहीं हो पाई है।
नगर निकाय के अगले वर्ष होने जा रहे चुनाव से पहले सरकार ने सीमा विस्तार और परिसीमन की बडे़ स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। सरकार ने 42 निकायों का सीमा विस्तार करने का निर्णय लिया है, जबकि 46 निकायों में नए सिरे से परिसीमन की बाध्यता इसलिए है, क्योंकि 2011 की जनगणना के आंकडे़ सामने आ गए हैं।
सरकार ने एक लाख की आबादी पार कर चुके कोटद्वार और ऋषिकेश नगर पालिकाओं को अपग्रेड करने का निर्णय लिया है। इसके बाद, इन पालिकाओं के बोर्ड का भंग होना पहले से ही तयशुदा माना जा रहा था।
राज्य निर्माण से पहले इसी तरह की स्थितियों में देहरादून नगर निगम का बोर्ड भी भंग हो गया था। कोटद्वार की अध्यक्ष रश्मि राणा बसपा, तो ऋषिकेश के अध्यक्ष दीप शर्मा कांग्रेस से जुडे़ हैं।
उच्चीकृत हो जाने के बाद कोटद्वार और ऋषिकेश नगर पालिका परिषदों को अब किसी भी समय भंग किया जा सकता है। एक्ट में इसी तरह की व्यवस्था है। अन्य नगर निकायों के बोर्ड के संबंध में अभी सरकार को विधिक राय प्राप्त नहीं हुई है।
-मदन कौशिक, शहरी विकास मंत्री।