कोटद्वार के जंगलों में बादल फटने के बाद मची तबाही में सर्वाधिक प्रभावित रिफ्यूजी कालोनी में एक पखवाड़े बाद जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है। करीब 50 परिवारों वाली इस कालोनी में मलबा हटाने के बाद करीब 15 परिवार अपने घरों में रहने लगे हैं। करीब 35 परिवार गोविंदनगर स्थित गुरुद्वारे और अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
गत तीन और चार अगस्त को कोटद्वार में बादल फटने के बाद आई बाढ़ को 15 दिन बीत गए हैं। देवीरोड और हाइडिल रोड से करीब छह फीट गहरा स्थान होने के कारण रिफ्यूजी कालोनी के लोगों को बाढ़ का सबसे अधिक नुकसान झेलना पड़ा था। पखवाड़ेभर बाद भी कालोनी में कई स्थानों पर जमा मलबा अभी पूरी तरह से नहीं हटाया जा सका है। बाढ़ के मलबे से आ रही दुर्गंध लोगों को परेशान कर रही है। लोगों के दिलों दिमाग से बाढ़ की दहशत अभी तक बनी हुई है। आसमान में बादल घिरने और बारिश में लोग घरों को छोड़कर गुरुद्वारे या फिर नाते रिश्तेदारों के यहां चले जाते हैं।
इस क्षेत्र से नगर पालिका के सभासद विनय भाटिया का कहना है कि बाढ़ ने कालोनीवासियों को बहुत जख्म दिए हैं। अब धीरे-धीरे लोग अपने घरों में लौटने लगे हैं। जिन घरों में आपदा से मौत हुई थी, वे घर अभी खाली हैं। तीन मौतों से कालोनी में सन्नाटा पसरा हुआ है।