थलनदी पर बना पैदल पुल बहा, कृषि भूमि नष्ट
अतिवृष्टि से यमकेश्वर ब्लॉक में भारी नुकसान हुआ। बारिश से उफनाई सतेड़ी नदी में आई बाढ़ से झंपा पुल का एक पिलर बह गया जबकि यमकेश्वर और दुगड्डा ब्लाॅक को जोड़ने वाला नाड़ी काटल में थलनदी पर बना पैदल पुल बह गया। वहीं कांडी गांव में तीन गोशालाएं मलबे में दब गईं और 11 मवेशी मलबे में दबकर मर गए। मुंडगांव में एक घराट के साथ ही कई नाली कृषि भूमि बह गई। जिला पंचायत सदस्य विनोद डबराल ने बताया कि कांडी गांव में भारी बारिश से मदन सिंह, राजेश नेगी, सुरमान सिंह की गोशालाएं मलबे में दब गईं और 11 मवेशी मर गए। ग्रामीण राम सहाय सिंह नेगी और विजयपाल सिंह का शौचालय और पानी की टंकी मलबे में दब गए।
भूस्खलन से निर्मल कुमार, श्याम लाल, ध्रुवपाल सिंह नेगी, राम सहाय सिंह नेगी और विजयपाल सिंह के मकान को खतरा हो गया है। ध्रुवपाल सिंह नेगी के परिवार को अन्य भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। उधर मुंडगांव में रमेश चंद्र बधानी का घराट, संजय कुमार, अमरदेव, हेमंत कुमार, रमेश चंद्र, गणेश चंद्र, महेश चंद्र सुनील कुमार की करीब 25 नाली कृषि भूमि बाढ़ में बह गई। जिला पंचायत सदस्य विनोद डबराल, मंडी समिति के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक सिंह नेगी, ग्राम प्रधान अनुज नेगी ने शासन से प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग की। सूचना पर राजस्व विभाग की टीम ने गांव का मौका मुआयना किया है।
कलालघाटी पुलिस और एसडीआरएफ ने बचाई मालन में फंसे 22 मजदूरों की जान
अचानक मालन नदी में मंगलवार शाम को आई बाढ़ के कारण कॉजवे कर मरम्मत में लगे 22 मजदूर फंस गए थे। इन मजदूरों में से 12 लोगों को तो शाम को ही निकाल लिया गया था जबकि अन्य मजदूर लकड़ी के दो फट्टों के बीच फंस गए थे। सूचना मिलते ही कोटद्वार से कोतवाल मणिभूषण श्रीवास्तव एसडीआरएफ के साथ मौके पर पहुंचे और सभी को जेसीबी और रस्सों के सहारे देर रात सुरक्षित निकाला। जबकि बाढ़ के कारण कॉजवे के पास खड़ी आठ बाइकें, एक छोटा हाथी नदी के उफान में बह गए और एक रोड रोलर मलबे में दब गया। कॉजवे बहने से भाबर के लिए वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई। लोनिवि फिलहाल नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार कर रहा है।