इसके साथ ही उन्हें कॉल कट नहीं करने और लगातार व्हाट्सएप पर संपर्क में रहने का मानसिक दबाव बनाया। फिर बचाव के लिए उनसे रुपयों की डिमांड की गई। प्राध्यापिका ने पीछा छुड़ाने के लिए अपनी समस्त जमा पूंजी बताए गए नंबर पर ट्रांसफर कर दी। इसके बाद प्राध्यापिका को फिर से डिजिटल अरेस्ट कर उनसे और रुपयों की डिमांड की गई। इस बार उन्होंने अपने संबंधियों की मदद से भी लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए। अलग-अलग तारीखों (8,16,18 व 19) में साइबर ठगों को 1.11 करोड़ रुपये देने के बाद प्राध्यापिका की आंख खुली।
वरिष्ठ प्राध्यापिका को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साथ ही जांच के लिए इसे साइबर थाना/एसटीएफ देहरादून रेफर किया गया है।
- निहारिका सेमवाल, सीओ कोटद्वार।