साथी की मौत के बाद घटनास्थल पर मंडराते रहे हाथी
जिस जगह ट्रेन की चपेट में आने से हाथी की मौत हुई, उसके आसपास दो हाथी मंडराते नजर आए। घटनास्थल पर कुछ लोगों की मौजूदगी के कारण वे हाथी के शव तक तो नहीं पहुंच पाए, लेकिन हाईवे किनारे हाथियों की मौजूदगी से राहगीरों के लिए खतरा बना रहा। बता दें कि बीते करीब डेढ़ वर्ष में तीन हाथियों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है।
ट्रेन की टक्कर से हाथी की मौत की जानकारी मिलने पर बिजनौर वन प्रभाग नजीबाबाद की कौड़िया वन रेंज के रेंजर सचिन शर्मा, रेलवे के यातायात निरीक्षक पीके सिंह एवं अन्य रेल व वनकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। सूत्रों ने बताया कि रेलवे की ओर से किलोमीटर संख्या 20-21 के बीच ट्रेन की गति पर 35 किमी प्रतिघंटा का कॉशन (धीमी गति) तो लगाया गया है, लेकिन वह शाम छह से सुबह छह बजे तक के लिए ही लागू है। रेलवे का मानना है कि इन 12 घंटे के अलावा रेल ट्रैक को हाथी पार नहीं करेगा।