नगर पालिका के समय से ही थी घोटालों की आदतकोतवाली पुलिस ने घोटाले और गबन के आरोपी पंकज के खिलाफ दो मुकदमे और लिखे हैं। कोतवाल विजय सिंह ने बताया कि सहायक नगर आयुक्त अजहर अली की तहरीर के आधार पर उसके खिलाफ तीन लाख रुपये गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले की जांच बाजार चौकी इंचार्ज पीएस नेगी को सौंपी गई है। यह मामला नगर पालिका के समय है। तब पंकज रावत निर्माण अनुभाग में पटल सहायक का काम देख रहे थे। पुलिस के अनुसार पंकज रावत को नगर पालिका के समय से ही गबन और घोटालों की आदत पड़ चुकी थी लेकिन सूचना के अधिकार से हासिल जानकारी के बाद यह मामला पकड़ में आया।
96.35 लाख के गबन में सात के खिलाफ मुकदमा
नगर निगम में 24 लाख रुपये के घोटाले के बाद मिले 96.35 लाख रुपये के नए घोटाले में भी मास्टर माइंड लेखा लिपिक पंकज रावत समेत सात लोगों के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। कोतवाल विजय सिंह ने बताया कि इस मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त किशन सिंह नेगी ने पंकज रावत, ठेकेदार एहसान अहमद, नीरज रावत, अहसान, राजपाल सिंह, सुमिता देवी और रमेश चंद्र चौधरी के खिलाफ तहरीर दी थी। इन लोगों ने 23 चेकों के माध्यम से 96.35 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त किया जिसकी पूर्व में विभागीय जांच सहायक नगर आयुक्त कर चुके हैं। विभागीय जांच में यह बात सामने आई कि ये भुगतान पंजिका में दर्ज नहीं हुए। जांच रिपोर्ट में नगर निगम के खातों से 96,34,860 रुपये की धनराशि के अवैध रूप से भुगतान होने की पुष्टि हुई।
10 हजार का ईनामी अपराधी घोषित था पंकज रावत
मास्टर माइंड लेखा लिपिक पंकज रावत 14 अक्तूबर को दर्ज पहले मुकदमे के बाद से फरार चल रहा था। इस बीच उसके खिलाफ अदालत से गैरजमानती वारंट जारी किया गया। इसके बाद भी पकड़ में न आने पर उसे दस हजार रुपये का ईनामी अपराधी घोषित किया गया।