बड़े नोटों पर मोदी सरकार की पाबंदी के खिलाफ उत्तराखंड कांग्रेस चाहकर भी विरोध नहीं कर पा रही है। उलटे पार्टी ने फैसले का स्वागत किया है।
वह जल्दबाजी में ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाह रही है जिसका उसकी चुनावी रणनीति पर प्रतिकूल असर पड़े। पार्टी नेताओं को फिलहाल संयम बरतने और पब्लिक का रिएक्शन वॉच करने की सलाह दी गई है। ऐसे संकेत हैं कि दो-तीन दिन में अगर पब्लिक का रिएक्शन बढे़गा तो पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव ले आएगी।
मंगलवार की आधी रात के बाद से मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी लगा दी है। इस फैसले का केवल के आम और खास जनमानस पर ही असर नहीं पड़ा है। सूबे की सियासत में भी फैसले को लेकर खासी हलचल है। आसन्न विधानसभा चुनाव के लिहाज से सियासी दल फैसले को नफे-नुकसान के रूप में देख रहे हैं।
मजेदार बात यह है कि दूसरे राज्यों की तुलना में उत्तराखंड कांग्रेस ज्यादा रक्षात्मक दिखाई दे रही है। इसे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के बयान से समझा जा सकता है। वह कहते हैं,‘मोदी सरकार का यह अच्छा कदम है। लेकिन आम जनमानस की दिक्कतों को ध्यान में रखकर लिया जाता तो बेहतर था।’ किशोर इतना ही कह पाते हैं कि यह जल्दबाजी में लिया गया किंतु सही फैसला है। लेकिन फैसले के विरोध में वह खुलकर बोलने से परहेज कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत भी फैसले का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि 19 नवंबर से शुरू होने जा रही चुनावी यात्रा में कांग्रेस जिन प्रमुख मुद्दों को लेकर केंद्र पर निशाना साध रही है, उसमें एक मुद्दा काला धन भी है। उसके नेता काले धन को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते रहे हैं।
बड़े नोटों पर पाबंदी का आधार चूंकि काला धन माना जा रहा है, इसलिये कांग्रेस के पास चुप रहने के सिवाय कोई चारा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की ओर से पदाधिकारियों को फिलहाल धैर्य रखने की सलाह दी गई है। पार्टी की अगली रणनीति आमजनमानस के रिएक्शन पर है। नोटों पर पाबंदी से पब्लिक का जैसे-जैसे रिएक्शन बढ़ेगा, कांग्रेस अपनी रणनीति में बदलाव करेगी। ऐसे संकेत हैं कि यदि फैसले के विरोध में जन असंतोष फूटा तो पार्टी भी स्टैंड ले लेगी। लेकिन तब तक पार्टी ने वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाई है।